आश्विन शुक्लपक्ष व्रत - रथनवमी

व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।


रथनवमी

( भविष्यपुराण ) -

इसी दिन ( आ- शु० ९ को ) नवीन रथमें आसन बिछाकर महिषारुढ महिषघ्रीकी स्वर्णनिर्मित मूर्ति स्थापित करके पूजन करे और रथको राजमार्गोंमें भ्रमण कराकर यथास्थान ले आये और भगवतीका पुनः पूजन करके रथोत्सव - व्रत समाप्त करे ।

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Last Updated : January 21, 2009

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