अथ नवमस्तोत्रम्

मध्वाचार्य (१२३८-१३१७ ईस्वी) हे तेराव्या शतकातील महान भारतीय दार्शनिक आणि वेदांतातील द्वैतवाद (तत्ववाद) संप्रदायाचे संस्थापक होते.


अतिमततमोगिरिसमितिविभेदन पितामहभूतिद गुणगणनिलय ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥१॥

विधिभवमुखसुरसततसुवंदितरमामनोवल्लभ भव मम शरणम् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥२॥

अगणितगुणगणमयशरीर हे विगतगुणेतर भव मम शरणम् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥३॥

अपरिमितसुखनिधिविमलसुदेह हे विगत सुखेतर भव मम शरणम् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥४॥

प्रचलितलयजलविहरण शाश्वतसुखमयमीन हे भव मम शरणम् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥५॥

सुरदितिजसुबलविलुलितमंदरधर पर कूर्म हे भव मम शरणम् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥६॥

सगिरिवरधरातलवह सुसूकरपरमविबोध हे भव मम शरणम् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥७॥

अतिबलदितिसुत हृदय विभेदन जयनृहरेऽमल भव मम शरणम् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥८॥

बलिमुखदितिसुतविजयविनाशन जगदवनाजित भव मम शरणम् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥९॥

अविजितकुनृपतिसमितिविखंडन रमावर वीरप भव मम शरणम् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥१०॥

खरतरनिशिचरदहन परामृत रघुवर मानद भव मम शरणम् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥११॥

सुललिततनुवर वरद महाबल यदुवर पार्थप भव मम शरणम् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥१२॥

दितिसुतविमोहन विमलविबोधन परगुणबुद्ध हे भव मम शरणम् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥१३॥

कलिमलहुतवह सुभग महोत्सव शरणद कल्कीश भव मम शरणम् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥१४॥

अखिलजनिविलय परसुखकारण परपुरुषोत्तम भव मम शरणम् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥१५॥

इति तव नुतिवरसततरतेर्भव सुशरणमुरुसुखतीर्थमुनेः भगवन् ।
शुभतम कथाशय परमसदोदित जगदेककारण रामरमारमण ॥१६॥

इति श्रीमदानंदतीर्थभगवत्पादाचार्य विरचितं
द्वादशस्तोत्रेषु नवमस्तोत्रं संपूर्णम्

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Last Updated : August 12, 2026

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