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श्रीसूक्त लक्ष्मीपूजन - चतुर्थ पूजा

दीपावली के पाँचो दिन की जानेवाली साधनाएँ तथा पूजाविधि कम प्रयास में अधिक फल देने वाली होती होती है और प्रयोगों मे अभूतपूर्व सफलता प्राप्त होती है ।


चतुर्थ पूजा

महालक्ष्मी पूजन

उक्त समस्त प्रक्रिया के पश्चात प्रधान पूजा में भगवती महालक्ष्मी का पूजन करना चाहिए । पूजा में अपने सम्मुख महालक्ष्मी का बडा चित्र अथवा लक्ष्मी -गणेश का पाना लगाना चाहिए । पूजन से पूर्व नवीन चित्र और श्रीयन्त्र तथा द्रव्यलक्ष्मी ( स्वर्ण अथवा चॉंदी के सिक्के ) आदि की निम्नलिखित मन्त्र से अक्षत छोडकर प्रतिष्ठा कर लेनी चाहिए :

अस्यै प्राणाः प्रतिष्ठन्तु अस्यै प्राणाः क्षरन्तु च ।

अस्यै देवत्वमर्चायै मामहेति च कश्चन ॥

ध्यान

ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्त्रजाम ।

चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ॥

ॐ महालक्ष्मै नमः । ध्यानार्थे पुष्पं समर्पयामि ॥

ध्यान हेतु मॉं लक्ष्मी को कमल अथवा गुलाब का पुष्प अर्पित करें ।

आवाहन

ॐ तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनगामिनीम ।

यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्चं पुरुषानहम ॥

ॐ कमलायै नमः । कमलाम आवाहयामि , आवाहनार्थे पुष्पाणि समर्पयामि ॥

मॉं लक्ष्मी का पूजन करने हेतु आवाहन करें और ऐसी भावना रखें कि मॉ लक्ष्मी साक्षात पूजन हेतु आपके सम्मुख आकर बैठी हों । आवाहन हेतु सामने चौकी पर पुष्प अर्पित करें ।

आसन

ॐ अश्वपूर्वां रथमध्यां हस्तिनादप्रमोदिनीम ।

श्रियं देवीमुप ह्रये श्रीर्मादेवी जुषताम ॥

ॐ रमायै नमः । आसनं समर्पयामि ॥

आसनार्थे पुष्पं समर्पयामि ॥

आसन हेतु सामने चौकी पर पुष्प अर्पित करें ।

पाद्य

ॐ कां सोमिस्तां हिरण्यप्राकारामार्द्रां ज्वलन्तीं तृप्तां तर्पयन्तीम ।

पद्मेस्थितां पद्मवर्णां तामिहोप ह्रये श्रियम ॥

ॐ इन्दिरायै नमः । इन्दिरां पादयोः पाद्यं समर्पयामि ॥

मॉ लक्ष्मी को चन्दन आदि मिश्रित जल से पाद्य हेतु जल चढाए ।

अर्घ्य

ॐ चन्द्रां प्रभासां यशसा ज्वलन्तीं श्रियं लोके देवजुष्टामुदाराम ।

तां पद्मिनीमीं शरणं प्र पद्ये अलक्ष्मीर्मे नश्यतां त्वां वृणे ॥

ॐ समुद्रतनयायै नमः । समुद्रतनयां हस्तयोरर्घ्यं समर्पयामि ॥

मॉं लक्ष्मी को सुगन्धित जल से अर्घ्य प्रदान करें ।

आचमन एवं पंचामृत

आदि से स्नान

ॐ आदित्यवर्णे तपसोऽधि जातो वनस्पतिस्तव वृक्षोऽथ बिल्वः ।

तस्य फलानि तपसा नुदन्तु या अन्तरा याश्च बाह्या अलक्ष्मीः ॥

ॐ भृगुतनयायै नमः ॥ भृगुतनयाम आचमनीयं जलं समर्पयामि । स्नानीयं जलं समर्पयामी । पंचामृत स्नानं समर्पयामी ।

मॉं लक्ष्मी को आचमन हेतु जल चढाए एवं क्रमशः शुद्ध जल और पंचामृत से स्नान करवाए ।

वस्त्र

ॐ उपैतु मां देवसखः कीर्तिश्च मणिना सह ।

प्रादुर्भूतोऽस्मि राष्ट्रेस्मिन कीर्तिमृद्धिं ददातु मे ॥

ॐ पद्मायै नमः ॥ पद्मां वस्त्रं समर्पयामी । उपवस्त्रं समर्पयामी ॥

मॉं लक्ष्मी को वस्त्र और उपवस्त्र चढाए ।

आभूषण

ॐ क्षुत्पिपासामलां ज्येष्ठालक्ष्मीं नाशयाम्यहम ।

अभूतिमसमृद्धिं च सर्वां निर्णुद मे गृहात ॥

ॐ कीर्त्यै नमः ॥ नानाविधानि कुण्डलकटकादीनि आभूषणानि समर्पयामि ॥

मॉं लक्ष्मी को विभिन्न प्रकार के आभूषण अथवा तन्निमित्त अक्षत -पुष्प अर्पित करें ।

गन्धाक्षत , सिन्दूर एवं इत्र

ॐ गन्धद्वारां दुराधर्षां नित्यपुष्टां करीषिणीम ।

ईश्वरीं सर्वभूतानां तामिहोप ह्रये श्रियम ॥

ॐ आर्द्रायै नमः । आर्द्रां गन्धं समर्पयामी ।

गन्धान्ते अक्षतान समर्पयामी ।

सिन्दूरं समर्पयामी ।

सुगन्धिद्रव्यं समर्पयामी ।

मॉं लक्ष्मी को क्रमशः गन्ध , अक्षत सिन्दूर एवं इत्र अर्पण करें ।

पुष्प एवं पुष्पमाला

ॐ मनसः काममाकूतिं वाचः सत्यमशीमहि ।

पशूनां रुपमत्रस्य मयि श्रीः श्रयतां यशः ॥

ॐ अनपगामिन्यै नमः । अनपगामिनीं पुष्पमालां समर्पयामि ॥

मॉं लक्ष्मी को लाल रंग के पुष्प अर्पित करें ।

धूप

ॐ कर्दमेन प्रजा भूता मयि सम्भव कर्दम ।

श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम ॥

ॐ महालक्ष्मै नमः । धूपम आघ्रापयामि ।

गुग्गुल आदि की सुगन्धित धूप जलाकर मॉं लक्ष्मी की ओर धूप प्रसारित करें ।

दीप

ॐ आपः सृजन्तु स्निग्धानि चिक्लीत वस मे गृहे ।

नि च देवीं मातरं श्रियं वासय मे कुले ॥

ॐ श्रियै नमः । श्रियं दीपकं दर्शयामि ॥

चार बत्तियों वाला एक दीपक प्रज्वलित करें । मॉं लक्ष्मी को यह दीपक दिखाए ।

नैवेद्य

ॐ आर्द्रां पुष्करिणीं पुष्टिं पिडलां पद्ममालिनीम ।

चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ॥

ॐ अश्वपूर्वायै नमः । अश्वपूर्वां नैवेद्यं निवेदयामि । मध्ये पानीयम , उत्तरापोऽशनार्थं हस्तप्रक्षालनार्थं मुखप्रक्षालनार्थं च जलं समर्पयामि । ऋतुफलं समर्पयामि । आचमनीयं जलं समर्पयामि ।

मॉं लक्ष्मी को क्रमशः नैवेद्य , आचमन , ऋतुफल तथा आचमन अर्पित करें ।

ताम्बूल

ॐ आर्द्रां यः करिणीं यष्टिं सुवर्णां हेममालिनीम ।

सूर्यां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आ वह ॥

ॐ गन्धद्वारायै नमः । गन्धद्वारां मुखवासार्थं ताम्बूलवीटिकां समर्पयामि ॥

मॉं लक्ष्मी को मुखशुद्धि हेतु ताम्बूल अर्पित करें ।

दक्षिणा

ॐ तां म आ वह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम ।

यस्यां हिरण्यं प्रभूतं गावो दास्योऽश्वान विन्देयं पुरुषानहम ॥

ॐ हिरण्यवर्णायै नमः । हिरण्यवर्णां पूजा साफल्यार्थं दक्षिणां समर्पयामि ॥

किए गये पूजन कर्म की पूर्ण सफलता के लिए मॉं लक्ष्मी को यथाशक्ति दक्षिणा अर्पित करें ।

अंग पूजन

अब निम्नलिखित मन्त्रों का पाठ करते हुए मॉं लक्ष्मी के निमित्त अंग पूजा करें । प्रत्येक मन्त्र को पढकर कुछ गन्धाक्षत -पुष्प सामने मण्डल पर चढाए ।

ॐ चपलायै नमः , पादौ पूजयामि ।

ॐ चञलायै नमः , जानुनी पूजयामि ।

ॐ कमलायै नमः , कटिं पूजयामि ।

ॐ कात्यायन्यै नमः , नाभिं पूजयामि ।

ॐ जगन्मात्रे नमः , जठरं पूजयामि ।

ॐ विश्ववल्लभायै नमः , वक्षःस्थलं पूजयामि ।

ॐ कमलवासिन्यै नमः , हस्तौ पूजयामि ।

ॐ पद्माननायै नमः , मुखं पूजयामि ।

ॐ कमलपत्राक्ष्यै नमः , नेत्रत्रयं पूजयामि ।

ॐ श्रियै नमः , शिरः पूजयामि ।

ॐ महालक्ष्म्यै नमः , सर्वाडं पूजयामि ।

Translation - भाषांतर
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Last Updated : 2010-11-03T21:09:43.3230000

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