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सुभद्रा n. वसुदेव एवं देवकी की एक कन्या, जो कृष्ण एवं बलराम की छोटी बहन थी [म. आ. २११.१४] । स्कंद में इसकी माता का नाम सुप्रभा दिया गया है ।
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सुभद्रा n. इसे सुभद्रा नाम क्यों प्राप्त हुआ, इस संबंध में एक चमत्कृतिपूर्ण कथा स्कंद में प्राप्त है । पूर्व जन्म में यह गालव ऋषि की कन्या माधवी थी । एक बार गालव ऋषि इसे विष्णु के पास ले गये, जहाँ यह बालसुलभता से गद्दी पर बैठ गयी। इस कारण क्रुद्ध हो कर लक्ष्मी ने इसे अगले जन्म में ‘अश्वमुखी’ कन्या बनने का शाप दिया । इसका जन्म होते ही कृष्ण एवं बलराम ने ब्रह्म की प्रार्थना कर इसे भद्रमुखी बनाया, जिस कारण इसे ‘सुभद्रा’ नाम प्राप्त हुआ [स्कंद. ६.८१.८४] ।
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सुभद्रा n. $सुभद्राहरण -- बलराम इसका विवाह दुर्योधन से करना चाहता था । किन्तु एक बार अर्जुन ने इसे देखा, एवं श्रीकृष्ण के समक्ष इसे अपनी रानी बनाने का अपना मनोदय प्रकट किया [म. आ. २११.२०] । पश्चात् श्रीकृष्ण की सलाह से रैवतक पर्वत में हुए महोत्सव के समय अर्जुन ने यतिवेष में इसका हरण किया [म. आ. २१२] । रैवतक पर्वत से भागते समय इसने अर्जुन का सारथ्य किया था [म. आ. परि. १.२०] । आगे चल कर अर्जुन की सलाह से एक गोपी का वेश धारण कर यह द्रौपदी से मिलने गयी, एवं अपने विवाह के लिए इसने उसकी संमति प्राप्त की [म. आ. परि. १.१४. २१२-२१४] । द्वारका में कृष्ण ने भी क्रोधित हुए बलराम का मन इस विवाह के लिए अनुकूल बनाया । पश्चात् कुंती, विदुर, युधिष्ठिर आदि ज्येष्ठ लोगों की संमति कृष्ण ने ही प्राप्त कर ली। इस प्रकार सभी लोगों के आशीर्वाद के साथ इसका एवं अर्जुन का विवाह द्वारका नगरी में संपन्न हुआ [म. आ. २१३.१२] ।
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सुभद्रा n. इसके विवाह के समय कृष्ण ने अर्जुन को निम्नलिखित वस्तु दहेज के रूप में प्रदान की थीः- एक हजार सुवर्णरथ, दस हजार दुधालु गायें, एक हजार सुवर्णालंकृत अश्व, पाँच सौ तट्टू, एक हजार दासी, एक लाख बाह्लीक देशीय अश्व, दस मन सोना, एक हज़ार उन्मत्त हाथी [म. आ. २०७८-२०८५*] ।
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