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हजरकू हुजत नहीं

डोळ्यानें दिसणार्‍या गोष्टीला साक्ष नसते.

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हुजत   हौसकू मोल नहीं, गद्धेकू अक्कल नहीं   बुंद-बुंदसे गई वो हौदसे आती नहीं   हजरकू हुजत नहीं   नहीं नहीं म्हणस, संत्रजी पसरस   ढुंगण फाटे पण ढबला नहीं फाटे   बनिया-बनिया देते नहीं, पुरा तोल   लांबा साथे तुतो जीयाय, मरे नहीं पण मांदो थाय   लातोके भूत (देव) बातोसे नहीं मानते   पास नहीं कौडी, आम खरीदने दौडी   बत्तीस दांतकी भाखा खाली नहीं जाती   नातेकी रांड, गोदका छोरा, वालूकी भीत और बहमी बोरा ,ये किसीकू निहाल नहीं करते   विद्वानोको शिंग नहीं, और मुर्खको पुच्छ नहीं   चूक झाली पदरी घ्‍यावी, हुजत न करावी   फत्तरपर पाणी पडे, भीजे पण भीने नही, मूरखसे गीयान् कहे, बुझे पण रीझे नहीं   मुरख आगल वात, रिजे पण बुजे नहीं   हौदसे गयी, तो बुंदसे आती नहीं   रस्सी-रस्सी जलगयी पर बल नहीं गया   साच-साचको आंच नहीं   मिया देता नहीं पुरा तोल   माली सठयो फुललेशे, कांइ चोटलि तो नहीं लेशे   बात रह जाती है, बखत नहीं रहता   मन मिलेसो मेला, चित्त मिलेसो चेला, नहीं तो अकेला भला   होटोंसे अभी, दुधकी बो नहीं गयी   पथर मारे मौत नहीं   आपने छाचको कोयी खट्टा नहीं कहता   धोबीसे जीत नहीं, तो गद्धको क्यौं मारना   पथरको जोक नहीं लगती   बिन रोयोलडकाभी दूध नहीं पाता   लकडी बिगर मकडी नहीं वठणी आती   सब मिलना पण लंगोटीयार नहीं मिलना   मुया-मुयेपर कोथी किसीके काम आता नहीं   बनना-बनी तो भाई, नहीं तो दुशमनाई   रंडी रही तो आपसे, नहीं तो सगे बापसे   लिखना-तकदीरका लिखा, कमी नहीं चूका   बुधे भेटी, ने फेरी नहीं भेटी   सारा दिवस पिसा पिसा, चपनी भर नहीं आटा   ढुंगण फाटे पण ढबला नहीं फाटे   बुंद-बुंदसे गई वो हौदसे आती नहीं   बनिया-बनिया देते नहीं, पुरा तोल   हौसकू मोल नहीं, गद्धेकू अक्कल नहीं   नहीं नहीं म्हणस, संत्रजी पसरस   नातेकी रांड, गोदका छोरा, वालूकी भीत और बहमी बोरा ,ये किसीकू निहाल नहीं करते   पास नहीं कौडी, आम खरीदने दौडी   बत्तीस दांतकी भाखा खाली नहीं जाती   लातोके भूत (देव) बातोसे नहीं मानते   लांबा साथे तुतो जीयाय, मरे नहीं पण मांदो थाय   हजरकू हुजत नहीं   आपने छाचको कोयी खट्टा नहीं कहता   धोबीसे जीत नहीं, तो गद्धको क्यौं मारना   आपने छाचको कोयी खट्टा नहीं कहता   ढुंगण फाटे पण ढबला नहीं फाटे   धोबीसे जीत नहीं, तो गद्धको क्यौं मारना   नहीं नहीं म्हणस, संत्रजी पसरस   नातेकी रांड, गोदका छोरा, वालूकी भीत और बहमी बोरा ,ये किसीकू निहाल नहीं करते   पथरको जोक नहीं लगती   पथर मारे मौत नहीं   पास नहीं कौडी, आम खरीदने दौडी   फत्तरपर पाणी पडे, भीजे पण भीने नही, मूरखसे गीयान् कहे, बुझे पण रीझे नहीं   बत्तीस दांतकी भाखा खाली नहीं जाती   बुंद-बुंदसे गई वो हौदसे आती नहीं   बुधे भेटी, ने फेरी नहीं भेटी   बनना-बनी तो भाई, नहीं तो दुशमनाई   बनिया-बनिया देते नहीं, पुरा तोल   बात रह जाती है, बखत नहीं रहता   बिन रोयोलडकाभी दूध नहीं पाता   मन मिलेसो मेला, चित्त मिलेसो चेला, नहीं तो अकेला भला   मुया-मुयेपर कोथी किसीके काम आता नहीं   मुरख आगल वात, रिजे पण बुजे नहीं   माली सठयो फुललेशे, कांइ चोटलि तो नहीं लेशे   मिया देता नहीं पुरा तोल   रंडी रही तो आपसे, नहीं तो सगे बापसे   रस्सी-रस्सी जलगयी पर बल नहीं गया   लकडी बिगर मकडी नहीं वठणी आती   लातोके भूत (देव) बातोसे नहीं मानते   लांबा साथे तुतो जीयाय, मरे नहीं पण मांदो थाय   लिखना-तकदीरका लिखा, कमी नहीं चूका   विद्वानोको शिंग नहीं, और मुर्खको पुच्छ नहीं   सब मिलना पण लंगोटीयार नहीं मिलना   साच-साचको आंच नहीं   सारा दिवस पिसा पिसा, चपनी भर नहीं आटा   हुजत   होटोंसे अभी, दुधकी बो नहीं गयी   हौदसे गयी, तो बुंदसे आती नहीं   हौसकू मोल नहीं, गद्धेकू अक्कल नहीं   
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