TransLiteral Foundation
चंद्रहासाख्यान

चंद्रहासाख्यान

कीर्तनासंबंधी ज्ञान संपादन करून, नंतर स्वार्थ वा परमार्थ संपादन व्हावा या उद्देशाने कीर्तन करून लोकांस ज्ञान सांगण्यासाठी कीर्तनकार आख्यान लावतात.

  • चंद्रहासाख्यान - कीर्तन पूर्वरंग निरुपण
    कीर्तनासंबंधी ज्ञान संपादन करून, नंतर स्वार्थ वा परमार्थ संपादन व्हावा या उद्देशाने कीर्तन करून लोकांस ज्ञान सांगण्यासाठी कीर्तनकार आख्यान लावतात.
  • चंद्रहासाख्यान - चंद्रहासाख्यान
    कीर्तनासंबंधी ज्ञान संपादन करून, नंतर स्वार्थ वा परमार्थ संपादन व्हावा या उद्देशाने कीर्तन करून लोकांस ज्ञान सांगण्यासाठी कीर्तनकार आख्यान लावतात.
: Folder : Page : Word/Phrase : Person

References : N/A
Last Updated : 2010-03-03T21:12:57.6270000

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.

प्रवाहण (जैवलि)

  • n. पांचाल देश का एक राज, जो दार्शनिक शास्त्रार्थो में प्रवीण था [बृ.उ.६.१.७, माध्यं, छां.उ.१.८.१,५.३.१] । यह उद्दालक राजा का समकालीन था । सम्भवतः जैमिनीय उपनिषद्‍ ब्राह्मण में निर्दिष्ट ‘जैवलि’ इसीका नामांतर है । जीवल का वंशज होने के कारण, इसे ‘जैवलि’ अथवा ‘जैवल’ उपाधि प्राप्त हुयी होगी । यह परम विद्वान एवं ज्ञानी होने के साथ, तत्त्वज्ञान का महापंडित भी था । एक बार इसने अपने पांचाल राज्य में तत्त्वज्ञान परिषद का आयोजन किया । वहॉं तत्वचर्चा में इसे पराजित करने के उद्देश्य से, श्वेतकेतु आरुणेय उस परिषद में आया । किन्तु राजा के द्वारा पूँछे गये पॉंच प्रश्नों में से एक का भी उत्तर वह न दे सका । पराजित होकर वह अपने घर गया, तथा ज्ञानशिक्षा देनेवाले अपने पिता पर अत्यधिक क्रुद्ध होकर, ब्राह्मण द्वारा पूँछे गये प्रश्नों के उत्तर पूँछने लगा । श्वेतकेतु का पिता उद्दालक आरुणि भी उन प्रश्नों का उत्तर न दे सका । फिर वे दोनों प्रवाहण राजा की शरण में आकर, इससे ‘ब्रह्मविद्या’ की दीक्षा मॉंगने लगे । इसने स्वयं क्षत्रिय हो कर भी उन ब्राह्मणों को दीक्षित किया । अब तक यह ज्ञान क्षत्रियों के ही पास था । यह पहली व्यक्ति है, जिसने यह परमज्ञान ब्राह्मणों को प्रदान किया । उद्‌गीथ की उपासना के सम्बन्ध में इसका ‘शिलक शालावत्य’ एवं ‘चैकितायन दाल्भ्य’ नामक ऋषियों से शास्त्रार्त्र हुआ था [छा.उ.१.८.१];[ बृ.उ.६.२.१] 
RANDOM WORD

Did you know?

सत्यनारायण पूजेला धर्मशास्त्रीय आधार आहे काय? हे व्रत किती पुरातन आहे?
Category : Hindu - Traditions
RANDOM QUESTION
Don't follow traditions blindly or ignore them. Don't assume a superstition either. Don't be intentionally ignorant. Ask us!!
Hindu customs are all about Symbolism. Let us tell you the thought behind those traditions.
Make Informed Religious decisions.