भजन - अब मैं कौन उपाय करूँ ॥ ...

हरिभक्त कवियोंकी भक्तिपूर्ण रचनाओंसे जगत्‌को सुख-शांती एवं आनंदकी प्राप्ति होती है।


अब मैं कौन उपाय करूँ ॥

जेहि बिधि मनको संसय छूटै, भव-निधि पार करूँ ।

जनम पाय कछु भलौ न कीन्हों, तातें अधिक डरूँ ॥

गुरुमत सुन कछु ग्यान न उपजौ, पसुवत उदर भरूँ ।

कह नानक, प्रभु बिरद पिछानौ, तब हौं पतित तरूँ ॥

N/A

References : N/A
Last Updated : December 20, 2007

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.
TOP