हिंदी सूची|पूजा एवं विधी|श्राद्धकर्म|तीर्थ श्राद्ध विधि| तीर्थ यात्रा तीर्थ श्राद्ध विधि तीर्थ यात्रा दक्षिणा श्राद्धारम्भ तीर्थ श्राद्ध विधि - तीर्थ यात्रा शास्त्रों में तीर्थयात्रा करना एक विशेष पुण्य-कर्म कहा गया है। Tags : hindipoojashraddhavidhiपूजाविधीश्राद्धसंस्कारहिन्दी तीर्थ यात्रा Translation - भाषांतर मुण्डनं चोपवासञ्च सर्वतीर्थेष्वयं विधिः । वर्जयित्वा कुरुक्षेत्रं विशालां (उज्जैन) विरजां गयाम् ॥ – वा० पु०तीर्थे गच्छन् त्यजेत्प्रातः परान्नं परभोजनम् । जितेन्द्रियो जितक्रोधो ब्रह्मचारी भवेच्छुचिः ॥अन्यक्षेत्रे कृतं पापं पुण्यक्षेत्रे विनश्यति । पुण्यक्षेत्रे कृतं पापं वज्ज्रलेपो भविष्यति ॥ – स्कं० पु०तीर्थयात्रा पत्नी, पुरोहित और सेवक को छोड़कर न करे अर्थात इनको भी साथ ले जाये।तीर्थयात्रा पर्यटन आदि की भावना से न करे।वर्त्तमान में सम्पूर्ण तीर्थयात्रा पैदल नहीं चलते लेकिन प्राचीन काल में भी सभी पैदल चलने में समर्थ नहीं होते है इसलिये शास्त्रों द्वारा यह आज्ञा दी गयी कि तीर्थयात्री जितना पैदल चल सके कम-से-कम उतना पैदल चले।पादुका पहनकर तीर्थयात्रा निषिद्ध है अतः पैदल यात्रा पादुकारहित करे।जब तीर्थ का दर्शन हो तो प्रणाम करे और मुण्डन और उपवास करे।मुण्डन और उपवास करने का यह सामान्य तीर्थ नियम कुरुक्षेत्र, विशाला, विरजा और गया के अतिरिक्त है।मुण्डन के पश्चात् अन्य सामान्य जल से मलापकर्षण स्नान करे।फिर शुद्ध वस्त्रादि धारण कर तीर्थपूजा करने के लिये नारियल, पुष्पादि सामग्री सञ्चय करके तीर्थस्नान-पूजन करने तट पर जाये।तीर्थस्नान विधि के अनुसार स्नान, स्नानांग तर्पण करे।नारियल आदि से अर्घ्य प्रदान करके तीर्थ पूजा करे।भगवान विष्णु अथवा अपने इष्ट का विधि पूर्वक पूजन करे।तत्पश्चात तीर्थप्राप्ति निमित्तक पित्रादि श्राद्ध करे।तीर्थ यात्रानचात्र श्येनगृध्रादीन् पक्षिणः प्रतिषेधयेत् । तद्रूपाः पितरस्तस्य समायान्तीति वैदिकम् ॥ ( देवलस्मृतिः ) ॥ देवल के कथनानुसार तीर्थक्षेत्र में चील-बाज-गिद्ध आदि का भी प्रतिषेध न करे। वेद का मानना है कि उन सभी रूपों में पितर ही आते हैं। N/A References : N/A Last Updated : July 16, 2026 Comments | अभिप्राय Comments written here will be public after appropriate moderation. Like us on Facebook to send us a private message. TOP