द्वादश पटल - वाग्देवताध्यान

रूद्रयामल तन्त्रशास्त्र मे आद्य ग्रथ माना जाता है । कुण्डलिणी की सात्त्विक और धार्मिक उपासनाविधि रूद्रयामलतन्त्र नामक ग्रंथमे वर्णित है , जो साधक को दिव्य ज्ञान प्रदान करती है ।


वे शत्रुओं का हनन करने वाली हैं तथा कुलगत संस्कारों का सञ्चार करने वाली हैं । वे रोग का नाश करने वाली एवं प्रभु की भक्ति का बोध कराने वाली हैं । जिनका ह्रदयरूपी कमल का अमृतरुपी धन आहलाद देने वाला है तथा जो तीर्थ एवं आगम से शोक का नाश करने वाली हैं उन सुक्ष्मार्थ गणों में श्रेष्ठ प्रचलपा वाग्देवता का मैं ध्यान करता हूँ ॥४८॥

आथर्व पत्र ( चौथे ) पत्र में कोमल स्वभाव वाली वाद्यों को देने वाली तथा कमला का निवास है । वह किसी आने वाले का सन्देश सहसा कहती है , सर्वदा मङ्गल करती है , नित्य आवश्यक प्रताप उत्पन्न करती है , प्रियगणों की हितकारिणी है , प्रेमभाव का आश्रय करती है , वह कान्ता के विमल कमल मुख के मधु प्रेम का अभिलाष उत्पन्न करती है ॥४९॥

मेष में प्रश्नकर्ता सदैव तृप्ति करता है , सिंह का धनु तथा कुम्भ राशि के साथ फल इस प्रकार है - सिंह राशि वाले को रजत की प्राप्ति तथा चोरी से साप्त माल का लाभ होता है । सूर्योदय से १०० पल तक कास्य विहारण स्थित है । इस प्रकार सिंह राशि वाला पुरुष प्रातः काल अपने फलाफल को प्रगट करता है ॥५०॥

धनु राशि वाला भूतल में अपने इन्द्र धनुष से एक सौ धनुष् ‍ पर्यन्त देखता है ॥५१॥

अर्थ अस्पष्ट है ॥५२ - ५३॥

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Last Updated : July 29, 2011

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