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तारामती

n.  शैब्य देश के राजा की कन्या तथा अयोध्यापति हरिश्चन्द्र की पत्नी [मार्क ७.९] । हरिश्चन्द्र की सौ पत्नियों में यह पटरानी थी । वरुणकृपा से इसे रोहित नामक पुत्र हुआ [दे. भा७.१४] । विश्वामित्र की दक्षिणा पूर्ण करने के लिये, हरिश्चन्द्र ने इसको तथा राजपुत्र रोहित को, काशी के एक वृद्ध ब्राह्मण को बेच दिया [दे. भा. ७.२२] । पश्चात्, सर्पदंश से रोहित की मृत्यु हो गयी । उसे ले कर यह स्मशान गई। वहॉं लडके के खानेवाली राक्षसी समझ कर, लोग इसे राजा के पस ले गये । राजा ने चांडाल को इसका वध करने के लिये कहा । चांडाल ने यह कार्य करने की आज्ञा हरिश्चन्द्र को दी । उसने पत्नी को तथा पुत्र को पहचान लिया । यह अग्निप्रवेश करने को तैय्यार हुई । किंतु इन्द्र ने रोहित को जीवित किया । पश्चात् इन्द्र की कृपा से इसे स्वर्गप्राप्ति हुई [दे. भा.७.२५-२७]; हरिश्चंद्र देखिये ।

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