रामज्ञा प्रश्न - सप्तम सर्ग - सप्तक २

गोस्वामी तुलसीदासजीने श्री. गंगाराम ज्योतिषीके लिये रामाज्ञा-प्रश्नकी रचना की थी, जो आजभी उपयोगी है ।


सुक्र सुमंगल काज सब कहब सगुन सुभ देखि ।

जंत्र मंत्र औषधी सहसा सिद्धि बिसेषि ॥१॥

शुक्रवारको सभी मंगलकारी कायोंकें कायोंके लिये शुभ शकुन देखकर फल बताये । विशेषतः यन्त्र, मन्त्र, औषधि ( सम्बन्धी कार्य ) में ( यह दिन ) अकस्मात सफलता देनेवाला है ॥१॥

राम कृपा थिर काज सुभ, सनि बासर बिश्राम ।

लोह महिष गज बनिज भल, सुख सुपार गृह ग्राम ॥२॥

शनिवारको सब शुभकार्य बन्द रखे और विश्राम करे । श्रीरामकी कृपासे लोहे, भैस तथा हाथीके व्यापारमें भला होगा । घर - गाँवमें सुख - सुविधा रहेगी ॥२॥

राहु केतु उलटे चलहिं असुभ अमंगल मुल ।

रुंड मुंड पाखंड प्रिय असुर अमर प्रतिकुल ॥३॥

देवाताओंके विरोधी, पाखण्डप्रिय ( क्रमशः ) केवल सिर और धड़के रूपमें रहनेवाले राक्षस राहु और केतु उलटे ही चलते हैं । वे ( तथा यह शकुन ) अशुभ हैं, अमंगलकी जड़ हैं ॥३॥

सम‍उ राहु रबि गहनु मत राजहि प्रजहि कलेस ।

सगुन सोच, संकट बिकट, कलह कलुष दुख देस ॥४॥

यह समय सूर्यग्रहण लगनेके समान राजा - प्रजा दोनोंके लिये दुःखदायी है । इस शकुनका फल यह है कि चिन्ता, भारी विपत्ति, झगडा़ पाप और देशमें दुःख होगा ।४॥

राहु सोम संगमु बिषमु, असगुन उदधि अगाधु ।

ईति भीति खल दल प्रबल, सीदहिं भूसुस साधु ॥५॥

राहु और चन्द्रमाका ( ग्रहण ) योग भयंकर है, अथाह अपशकुनका समुद्र है । अकालादि दैवी उप्तात, भय तथा दुष्टोंके समूह प्रबल होंगे; ब्राह्मण और सत्पुरुष कष्ट पायेंगे ॥५॥

सात पाँच ग्रह एक थल चलहि बाम गति धाम ।

राज बिराजिय सम‍उ गत, सुभ हित सुमिरहु राम ॥६॥

सातमेंसे पाँच ग्रह* टेढी़ गतिसे अपने स्थानोंसे एक स्थानके लिये चले हैं । ( इस समय ) शासन तो समयानुसार विपरीत ही चलेगा. कल्याणके लिये श्रीरामका स्मरण करो ॥६॥

( प्रश्‍न-फल अशुभ है । )

खेती बनि बिद्या बनिज सेवा सिलिप सुकाज ।

तुलसी सुरतरु सरिस सुफल राम कें राज ॥७॥

तुलसीदासजी कहते हैं कि रामराज्यमें खेती, मजदुरी विद्या, वाणिज्य, सेवा, कारीगरी आदि सभी उत्तम कार्य कल्पवृक्षके समान ( अभीष्ट ) उत्तम फल देते थे ॥७॥ ( प्रश्‍न-फल शुभ है । )

* ग्रह नौ हैं, जिनमें राहु और केतु अप्रधान माने जाते है और उनका वर्णन ऊपर दोहोंमे हो भी चुका । शेष सातमेंसे दो सूर्य और चन्द्र सीधी चालसे चलते है तथा मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि-ये वक्री ( टेढी़ गतिवाले ) भी होते है और उस समय अशुभ माने जाते है ।

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Last Updated : January 22, 2014

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