हाथोंमें तीर्थ

प्रस्तुत पूजा प्रकरणात भिन्न भिन्न देवी-देवतांचे पूजन, योग्य निषिद्ध फूल यांचे शास्त्र शुद्ध विवेचन आहे.


शास्त्रोंमें दोनो हाथोंमे भी कुछ देवादितीर्थोंके स्थान बताये गये हैं । चारों अँगुलियोंके अग्रभागमें देवतीर्थ, तर्जनी अँगुलीके मूलभागमें 'पितृतीर्थ' कनिष्ठिकाके मूलभागमें 'प्रजापतितीर्थ' और अँगूठेके मूलभागमे 'ब्रह्मतीर्थ' माना जाता है । इसी तरह दाहिने हाथके बीचमें 'अग्नितीर्थ' और बायें हाथके बीचमें 'सोमतीर्थ' एवं अँगुलियोंके सभी पोरो और संधियोंमे 'ऋषितीर्थ' एवं अँगुलियोंके सभी पोरों और संधियोंमें 'ऋषितीर्थ' है । देवताओंको तर्पणमें जलाञ्जलि 'देवतीर्थ'से, ऋषियोंको प्रजापति (काय) तीर्थसे और पितरोंको 'पितृतीर्थ'से देनेका विधान है ।१

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Last Updated : November 26, 2018

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