यज्ञोपवीत-संस्कार एवं धारणकी विधि

प्रस्तुत पूजा प्रकरणात भिन्न भिन्न देवी-देवतांचे पूजन, योग्य निषिद्ध फूल यांचे शास्त्र शुद्ध विवेचन आहे.


यज्ञोपवीत-संस्कार एवं धारणकी विधि
यज्ञोपवीतमें देवताओंके आवाहनकी विधि -- यज्ञोपवीतको पलाश आदिके पत्तेपर रखकर जलसे प्रक्षालित करे, फिर निम्नलिखित एक-एक मन्त्र पढ़कर चावल अथवा एक-एक फूलको यज्ञोपवीतपर छोड़ता जाय --
प्रथमतन्तौ ॐ ओंकारमावाहयामि । द्वितीयतन्तौ ॐ अग्नि मावाहयामि । तृतीयतन्तौ ॐ सर्पानावाहयामि । चतुर्थतन्तौ ॐ सोममावाहयामि । पञ्चमतन्तौ ॐ पितृनावाहयामि । षष्ठतन्तौ ॐ प्रजापतिमावाहयामि । सप्तमतन्तौ ॐ अनिलमावाहयामि । अष्टमतन्तौ ॐ सूर्यमावाहयामि । नवमतन्तौ ॐ विश्वान् देवानावाहयामि । प्रथमग्रन्थौ ॐ ब्रह्मणे नम:, ब्रह्माणमावाहयामि । द्वितीयग्रन्थौ ॐ विष्णवे नम:, विष्णुमावाहयामि । तृतीयग्रन्थौ ॐ रुद्राय नम:, रुद्रमावाहयामि ।
इसके बाद 'प्रणवाद्यावाहितदेवताभ्यो नम:' -- इस मन्त्रसे 'यथास्थानं न्यसामि' कहकर उन-उन तन्तुओंमे न्यास कर चन्दन आदिसे पूजा करे । फिर जनेऊको दस बार गायत्रीसे अभिमन्त्रित करे ।

यज्ञोपवीत-धारण-विधि -- इसके बाद नूतन यज्ञोपवीतधारणका संकल्पकर निम्नलिखित विनियोग पढ़कर जल गिराये । फिर मन्त्र पढ़कर एक जनेऊ पहने, इसके बाद आचमन करे । फिर दूसरा यज्ञोपवीत धारण करे । एक-एक कर यज्ञोपवीत पहनना चाहिये ।
विनियोग --- ॐ यज्ञोपवीतमिति मन्त्रस्य परमेष्ठी ऋषि:, लिड्गोक्ता देवता:, त्रिष्टुप् छन्द:, यज्ञोपवीतधारणे विनियोग: ।
निम्न्लिखित मन्त्रसे जनेऊ पहने --

ॐ यज्ञोपवीतं परमं पवित्रं प्रजापतेर्यत् सहजं पुरस्तात् ।
आयुष्यमग्रयं प्रतिमुञ्च शुभ्रं यज्ञोपवीतं बलमस्तु तेज: ॥
ॐ यज्ञोपवीतमसि यज्ञस्य त्वा यज्ञोपवीतेनोपनह्मामि ।

जीर्ण यज्ञोपवीतका त्याग -- इसके बाद निम्नलिखित मन्त्र पढकर पुराने जनेऊको कण्ठी-जैसा बनाकर सिरपरसे पीठकी ओर निकालकर उसे जलमें प्रवाहित कर दे --

एतावाद्दिनपर्यन्तं ब्रह्म त्वं धारितं मया ।
जीर्णत्वात् त्वत्परित्यागो गच्छ सूत्र यथासुखम् ॥

इसके बाद यथाशक्ति गायत्री-मन्त्रका जप करे और आगेका वाक्य बोलकर भगवा‍न्‍को अर्पित कर दे -- ॐ तत्सत् श्रीब्रह्मार्पणमस्तु । फिर हाथ जोड़कर भगवा‍न्‍का स्मरण करे ।

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Last Updated : November 26, 2018

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