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नाथ अनाथकी सब जानै ॥ ठा...

भजन - नाथ अनाथकी सब जानै ॥ ठा...

हरिभक्त कवियोंकी भक्तिपूर्ण रचनाओंसे जगत्‌को सुख-शांती एवं आनंदकी प्राप्ति होती है।


नाथ अनाथकी सब जानै ॥

ठाढ़ी द्वार पुकार करति हौं, स्त्रवन सुनत नहिं कहा रिसानै ।

की बहु खोट जानि जिय मेरी, क कछु स्वारथ हित अरगानै ॥

दीन बंधु मनसाके दाता, गुन औगुन कैधों मन आनै ।

आप एक हम पतित अनेकन, यही देखि का मन सकुचानै ॥

झूठौं अपनो मान धरायो, समझ रहे हैं हमहि सयानै ।

तजो टेक मनमोहन मेरे, जुगलप्रिया दीजै रस दानै ॥

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Last Updated : December 25, 2007

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