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  • प्रल्हाद चरित्र
    संत नामदेवांनी भक्ति-गीते आणि अभंगांची रचना करून समस्त जनता-जनार्दनाला समता आणि प्रभु-भक्तिची शिकवण दिली.
  • प्रल्हाद चरित्र - भाग १
    संत नामदेवांनी भक्ति-गीते आणि अभंगांची रचना करून समस्त जनता-जनार्दनाला समता आणि प्रभु-भक्तिची शिकवण दिली.
  • प्रल्हाद चरित्र - भाग २
    संत नामदेवांनी भक्ति-गीते आणि अभंगांची रचना करून समस्त जनता-जनार्दनाला समता आणि प्रभु-भक्तिची शिकवण दिली.
  • प्रल्हाद चरित्र - भाग ३
    संत नामदेवांनी भक्ति-गीते आणि अभंगांची रचना करून समस्त जनता-जनार्दनाला समता आणि प्रभु-भक्तिची शिकवण दिली.
  • प्रल्हाद चरित्र - भाग ४
    संत नामदेवांनी भक्ति-गीते आणि अभंगांची रचना करून समस्त जनता-जनार्दनाला समता आणि प्रभु-भक्तिची शिकवण दिली.
  • प्रल्हाद चरित्र - भाग ५
    संत नामदेवांनी भक्ति-गीते आणि अभंगांची रचना करून समस्त जनता-जनार्दनाला समता आणि प्रभु-भक्तिची शिकवण दिली.
  • प्रल्हाद चरित्र - भाग ६
    संत नामदेवांनी भक्ति-गीते आणि अभंगांची रचना करून समस्त जनता-जनार्दनाला समता आणि प्रभु-भक्तिची शिकवण दिली.
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युवनाश्व II.

  • n. (स. इ.) इक्ष्वाकुवंश में उत्पन्न एक सुविख्यात नरेश, जो युवनाश्व द्वितीय नाम से सुविख्यात हैं । महाभारत में इसे सुद्युम्न राजा का पुत्र कहा गया है, जिस कारण इसे सौद्युम्नि नामान्तर भी प्राप्त था । विष्णु एवं वायु के अनुसार यह प्रसेनजित राजा का, मत्स्य के अनुसार रणाश्व का एवं भागवत के अनुसार सेनजित का पुत्र था । इसकी सौ पत्नियाँ थी, जिनमें से गौरी इसकी पटरानी थी । बहुत वर्षों तक इसे पुत्र न था । इसलिए पुत्रप्राप्ति के लिए भृगु ऋषि को अध्वर्यु बना कर इसने एक यज्ञ का आयोजन किया । यज्ञ समारोह की रात्रि में अत्यधिक प्यासा होने के कारण, इसने भृगुऋषि के द्वारा इसकी पत्नियाँ के लिए सिद्ध किया गया जल गलती से प्राशन किया । इसी जल के कारण, इसमें गर्भस्थापना हो कर इसकी बाय़ी कुक्षी से ‘मांधातृ’ नामक सुविख्यात पुत्र का जन्म हुआ [म. व. १९३.३];[ भा. ९.६,२५-३२]; मांधातृ देखिये । इसकी गौरी नामक पत्नी पौरवराजा मतिनार की कन्या थी । वायु में इसके द्वारा गौरी को शाप दिये जाने की एक कथा प्राप्त है, जिस कारण वह बाहुदा नामक नदी बन गयी [वायु. ८८.६६];[ ब्रह्मांड. ३.६३.६७];[ व्रह्म. ७.९१];[ ह. वं १.१२.५] । इसकी एक कन्या का नाम कावेरी था, जो गंगा नदी का ही मानवी रूप थी [ह. वं. १.२७.९] । अपनी इस कन्या को इसने नदी बनने का शाप दिया, जो आज ही नर्मदा नदी की सहाय्यक नदी के नातें विद्यमान है [मत्स्य., १८९.२-६] । अपने पूर्ववर्ती रैवत नामक राजा से इसे एक दिव्य खङग की प्राप्ति हुयी थी. जो इसने अपने वंशज रघु राजा को प्रदान किया था [म. शां. १६०.७६] यह एक सुविख्यात दानी राजा था, जिसने अपनी सारी पात्नियाँ एवं राज्य बाह्मणों को दान में दिया था [म. शां. २१६.२५] 
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Category : Hindu - Puja Vidhi
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