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संस्कृत सूची|शास्त्रः|तंत्र शास्त्रः|ललितार्चन चंद्रिका|
॥ ललिता सहस्र नामावलि ॥

॥ ललिता सहस्र नामावलि ॥

'ललितार्चन चंद्रिका' अर्थात् 'लधुचंद्रिका पद्धति' या प्रसिद्ध रचना सुंदराचार्य अर्थात् सच्चिदानंदनाथ यांच्या आहेत.


॥ ललिता सहस्र नामावलि ॥
॥ ललिता सहस्र नामावलि ॥

अ ऍ - हरीं - श्री
ओं श्रीमात्रे नमः

ओं श्रीमहाराज्ञयै नमः  चतुर्बाहु - समन्वितायै
श्रीमत्सिंहासनेश्वर्ये  रागस्वरूप - पाशाढ्यायै
चिदग्निकुण्ड - संभूतायै  क्रोधाकारङ्कुशोज्ज्वलायै
देवकार्य - समुद्यतायै  मनोरूपेक्षु - कोदण्डायै १०
उद्यद्भानु - सहस्राभायै  पञ्चतन्मात्र - सायकायै
निजारुण - प्रभापूर - पज्जद् - ब्रह्माण्डमण्डलायै नमः
चम्पकाशोक - पुन्नाग - सौगन्धिक - लसत्कचायै
अष्टमीचन्द्र - विभ्राज - दलिकस्थल - शोभितायै
मुखचन्द्र - कलङ्काभ - मृगनाभि - विशेषकायै
वदनस्मर - माङ्गल्य - गृहतोरण - चिल्लिमायै
बक्त्रलक्ष्मी - परावाह - चलन्मोनाभ - लोचनायै
नवचम्पक - पुष्पाभ - नासादण्ड - विराजितायै
ताराकान्ति - तिरस्कारि - नासाभरण - भासुरायै ॥२०॥
कदम्बमञ्जरी - क्ल्रुप्त - कर्णपूर - मनोहरायै
ताटङ्क - युगलीभूत - तपनोडुपमडलायै
ओं पद्मरागशिलादर्श - परिभावि - कपोलभुवे नमः
नवविद्रुम - बिम्बश्री - न्यक्कारि - रदनच्छदायै
शुद्धविद्याङ्कुराकार - द्विजपङ्क्ति - द्वयोज्ज्वलायै
कर्पूरवीटिकामोद - सःमाकर्षि - दिगन्तरायै
निजसल्लापमाधुर्य - विनिर्भर्त्सित - कच्छप्यै
मन्दस्मितप्रभापूर - मज्जत्कामेशमानसायै
अनाकलित - सादृश्य - चिबुकश्री - विराजितायै
कामेशबद्धमाङ्गल्य - सूत्रशोभित - कन्धरायै ३०
कनकाङ्गदकेयूर - कमनीय - भुजान्वितायै
रत्नग्रेवेय - चिन्ताक - लोलमुक्ता - फलान्वितायै
कामेश्वरप्रेमरत्न - मणिप्रतिपण - स्तन्यै
नाभ्याल बाल - रोमालि - लताफल - कुचद्वय्यै
लक्ष्यरोम - लताधारता - समुन्नेय - मघ्यमायै
स्तनभारदलन्मध्य - पट्टबन्ध - वलित्रयायै
अरुणारुणकौसुम्भ - वस्त्रभास्वत्कटीतटयै
रत्नकिङ्किंणिकारम्य - रशनादाम - भूषितायै
कामेशज्ञात - सौभाग्य - मार्दवीरुद्वयान्वितायै
माणिक्यमुकुटाकार - जानुद्वय - विराजितायै ४०
इन्द्रगोप - परिक्षिप्त - स्मरतूणाभ - जङ्धिकायै
गूढगुल्फायै
कूर्मपृष्ठ - जयिष्णु - प्रपदान्वितायै
नखदीधिति - सञ्छन्न - नमञ्जन - तमोगुणायै
पदद्वयप्रभाजाल - पराकृत - सरोरुहायै
सिञ्जानमणिमञ्जीर - मण्डित - श्रीपदाम्बुजायै
ओं मराली - मन्दगमनायै नमः
महालावण्य - शेवधयै
सर्वारुणायै
अनवद्याङ्ग्यै ५०
सर्वाभरण - भूषितायै
शिवकामेश्वराङ्कस्थायै
शिवायै
स्वाधीन - वल्लभायै
सुमेरु - मध्यश्रृङ्गस्थायै
श्रीमन्नगर - नायिकायै
चिन्तामणिगृहान्तस्थायै
पञ्चब्रह्मासन - स्थितायै
महापद्माटवी - संस्थायै
कदम्बवन - वासिन्यै ६०
सुधासागर - मध्यस्थायै
कामाक्ष्यै
कामदायिन्यै
देवर्षिगणसंघात - स्तूयमानात्मवैभवायै
भण्डासुरवधोद्युक्त - शक्तिसेना - समन्वितायै
सम्पत्करी - समारूढ - सिंधुरव्रज - सेवितायै
अश्वारूढाधिष्ठिताश्व - कोटिकोटिभि - रावृतायै
चक्रराजरथारूढ - सर्वायुध - परिप्कृतायै
गेयचक्ररथारूढ - मन्त्रिणी - परिसेवितायै
किरिचक्ररथारूढ - दण्डनाथा - पुरस्कृतायै ७०
ज्वालामालिनिकाक्षिप्त - वह्निप्राकार - मध्यगायै
भण्डसैन्यवधोद्युक्त - शक्तिविक्रम - हर्षितायै
नित्यापराक्रमाटोप - निरीक्षण - समुत्सुकायै
भण्डपुत्रवधोद्युक्त - बालाविक्रम - नन्दितायै
मन्त्रिण्यम्बाविरचित - विशुकगवध - तोषितायै
विषंगप्राणहरण - वाराहीवीर्य - नन्दितायै
कामेश्वरमुखालोक - कल्पित - श्रीगणेश्वरायै
महागणेशनिर्भिन्न - विघ्नयन्त्र - प्रहर्षितायै
ओं भण्डासुरेन्द्रनिर्मुक्त - शस्त्रप्रत्यस्त्र - वर्षिण्यै नमः
कराङ्गुलिनखोत्पन्न - नारायण - दशाकृत्यै ८०
महापाशुपतास्त्राग्नि - निर्दग्धासुर - सैनिकायै
कामेश्वरास्त्रनिर्दग्ध - सभण्डासुर - शून्यकायै
ब्रह्मोपेन्द्रमहेन्द्रादि - देवसंस्तुत - वैभवायै
हरनेत्राग्निसंदग्ध - कामसंजीवनौषध्यै
श्रीमद्वाग्भवकूटेक - स्वरूपमुखपङ्कजायै
कण्ठाधः - कटिपर्यन्त - मध्यकूठ - स्वरूपिण्यै
शक्तिकूटैकतापन्न - कट्यधोभाग - धारिण्यै
मूलमन्त्रात्मिकायै
मूलकूटत्रय - कलेवरायै
कूलामतैक - रसिकायै ९०
कुलसंकेत - पालिन्यै
कुलाङ्गनायै
कुलान्तस्थायै
कौलिन्यै
कुलयोगिन्यै
अकुलायै
समयान्तस्थायै
समयाचार - तत्परायै
मूलाधारैक - निलयायै
ब्रह्मग्रन्थि - विभेदिन्यै १००
मणिपूरान्तरुदितायै
विष्णुग्रन्थि - विभेदिन्यै
जाज्ञाचक्रान्तरालस्थायै
आ रुद्रग्रन्थि - विभेदिन्यै
सहस्राराम्बुजारूढायै
सुधासाराभिवर्षिण्यै
तटिल्लता - समरुच्यै
षट्चक्रोपरि - संस्थितायै
महासक्त्यै
कुण्डलिन्यै ११०
बिसतन्तु - तनीयस्यै
भवान्यै
भावनागम्यायै
भवारण्य - कुठारिकायै
भद्रप्रियायै
भद्रमूर्तयै
भक्तसौभाग्य - दायिन्ये
ओं भक्तिप्रियायै नमः
भक्तिगम्यायै
भक्तिवश्यायै १२०
भयापहायै
शाम्भव्यै
शारदाराध्यायै
शर्वाण्यै
शर्मदायिन्यै
शांकर्यै
श्रीकर्यै
साध्व्यै
शरच्चन्द्र - निभाननायै
शातोदर्यै १३०
शान्तिमत्यै
निराधारायै
निरञ्जानायै
निर्लेपायै
निर्मलायै
नित्यायै
निराकरायै
निराकुलायै
निर्गुणायै
निष्कलायै १४०
शान्तायै
निष्कामायै
निरुपप्लवायै
नित्यमुक्तायै
निर्विकारायै
निष्प्रपञ्चायै
निराश्रयायै
नित्यशुद्धायै
नित्यबुद्धायै
निरवद्यायै १५०
निरन्तरायै
निष्कारणायै
निष्कलङ्कायै
निरुपाधयै
निरीश्वरायै
नीरागायै
रागमथन्यै
निर्मदायै
मदनाशिन्यै
निश्चैन्तायै १६०
निरहंकारायै
निर्मोहायै
मोहनाशिन्यै
निर्ममायै
ममताहन्त्र्यै
ओं निष्पापायै नमः
पापनाशिन्यै
निष्क्रोधायै
क्रोधशमन्यै
निर्लोभायै १७०
लोभनाशिन्यै
निःसंशयायै
संशयघ्नयै
निर्भवायै
भवनाशिन्यै
निर्विकल्पायै
निराबाधायै
निर्भेदायै
भेदनाशन्यै
निर्नाशायै १८०
मृत्युमथन्यै
निष्क्रीयायै
निष्परिग्रहायै
निस्तुलायै
नीलचिकुरायै
निरपापायै
निरत्ययायै
दुर्लभायै
दुर्गमायै
दुर्गायै ९०
दुःखहन्त्र्यै
सुखप्रदायै
दुष्टदूरायै
दुराचारशमन्यै
दोषवर्जितायै
सर्वज्ञायै
सान्द्रकरुणायै
समानाधिकवर्जितायै
सर्वशक्तिमय्यै
सर्वमङ्गलायै २००
सद्गतिप्रदायै
सर्वेश्वर्यै
सर्वमय्यै
सर्वमन्त्रस्वरूपिण्यै
सर्वयन्त्रात्मिकायै
सर्वतन्त्ररूपायै
मनोन्मन्यै
माहेश्वर्यै
महादेव्यै
महालक्ष्म्यै २१०
मृडप्रियायै
महारूपायै
महापूज्यायै
ओं महापातकनाशिन्यै नमः
महामायायै
महासत्त्वायै
महाशक्त्यै
महारत्यै
महाभोगायै
महैश्वर्यायै २२०
महावोर्यायै
महाबलायै
महाबुद्धयै
महासिद्धयै
महायोगीश्वरेश्वर्यै
महातन्त्रायै
महामन्त्रायै
महायन्त्रायै
महासनायै
महायागक्रमाराध्यायै २३०
महाभैरव - पूजितायै
महेश्वरमहाकल्प - महाताण्डव - साक्षिण्यै
महाकामेश - महिष्यै
महात्रिपुरसुन्दर्यै
चतुःषष्टयुपचाराढ्यायै
चतुषष्टिकलामय्यै
महाचतुःषष्टिकोटि - योगिनी - गणसेवितायै
मनुविद्यायै
चन्द्रविद्यायै
चन्द्रमण्डल - मध्यगाण्यै २४०
चारुरूपायै
चारुहासायै
चारुचन्द्र - कलाधरायै
चराचर - जगन्नाथायै
चक्रराज - निकेतनायै
पार्वत्यै
पद्मनयनायै
पद्मराग - सम - प्रभायै
पञ्चप्रेतासनासीनायै
पञ्चब्रह्म - स्वरूपिणे २५०
चिन्मय्यै
परमानन्दायै
विज्ञानघन - रूपिण्यै
ध्यान - ध्यातृ - घ्येय - रूपायै
धर्माधर्म - विवर्जितायै
विश्वरूपायै
जागरिण्यै
स्वपन्त्यै
तैजसात्मिकायै
ओं सुप्तायै नमः २६०
प्राज्ञात्मिकायै
तुर्यायै
सर्वावस्था - विवर्जितायै
सृष्टिकत्र्यै
ब्रह्मरूपायै
गोप्त्र्यै
गोविन्द - रूपिण्यै
संहारिण्यै
रूद्ररूपायै
तिरोधानकर्यैं २७०
ईश्वर्यै
सदाशिवायै
अनुग्रहदायै
पञ्चकृत्य - परायणायै
भानुमण्डल - मध्यस्थायै
भैरव्यै
भगमालिन्ये
पद्मासनायै
भगवत्यै
पद्मनाभ - सहोदर्यै २८०
उन्मेषनिमिषोत्पन्न - विपन्नभुवनावल्यै
सहस्रशीर्षवदनायै
सहस्राक्ष्यै
सहस्रपदे
आब्रह्म - कीट - जनन्यै
वर्णाश्रम - विधायिन्यै
निजाज्ञारूप - निगमायै
पुण्यापुण्य - फलप्रदायै
श्रुतिसीमन्त - सिन्दूरिकृतपादाब्ज - धूलिकायै
सकलागमसंदोह - शुक्तिसंपुट - भौक्तिकायै २९०
पुरुषार्थप्रदायै
पूर्णायै
भोगिन्यै
भुवनेश्वर्यै
अम्विकायै
अनादिनिधनायै
हरिब्रह्मेन्द्र - सेवितायै
नारायण्यै
नादरूपायै
नामरूप - विवर्जितायै ३००
हरींकार्यै
हरीमत्यै
हृद्यायै
हेयोपादेय - वर्जितायै
ओं राजराजार्चितायै नमः
राज्ञयै
रम्यायै
राजीव - लोचनायै
रञ्जन्यै
रमण्यै ३१०
रस्यायै
रणत्किङ्किणि - मेखलायै
रमायै
राकेन्दुवदनायै
रतिरूपायै
रतिप्रियायै
रक्षाकर्यै
राक्षसध्न्यै
रामायै
रमणलम्पठायैं ३२०
काम्यायै
कामकलारूपायै
कदम्बकुसुम - प्रियायै
कल्याण्यै
जगतीकन्दायै
करुणारस - सागरायै
कलावत्यै
कलालापायै
कान्तायै
कादम्बरीप्रियायै ३३०
वरदायै
वामनयनायै
वारुणीमद - विह्वलायै
विश्वाधिकायै
वेदवेद्यायै
विन्ध्याचल - निवासिन्यै
विधात्र्यै
वेदजनन्यै
विष्णुमायायै
विलासिन्यै ३४०
क्षेत्रस्वरूपायै
क्षेत्रेश्यै
क्षेत्रक्षेत्रज्ञ - पालिन्यै
क्षयवृद्धि - विनिर्मुक्तायै
क्षेत्रपाल - समचितायै
विजयायै
विमलायै
वन्द्यायै
वन्दारुजन - वत्सलायै
वाग्वादिन्यै ३५०
वामकेश्यै
वह्निमण्डल - वासिन्यै
ओं भक्तिमत्कल्पलिकायै नमः
पशुपाश - विमोचिन्यै
संह्रताशेष - पाषण्डायै
सदाचार - प्रवर्तिकायै
तापत्रयाग्नि - सन्तप्त - समाह्लादन - चन्द्रिकायै
तरुण्यै
तापसाराध्यायै
तनुमध्यायै ३६०
तपोपहायै
चित्यैं
तत्पद - लक्ष्यार्थायै
चिदेक - रसरूपिण्यै
स्वात्मानन्द - लवीभूत -ब्रह्माद्यानन्दसन्तत्यै
परायै
प्रत्यक्चितीरूपायै
पश्यन्त्यै
परदेवतायै
मध्यमायै ३७०
वैंखरीरूपायै
भक्तमानस - हंसिकायै
कामेश्वर - प्राणनाङ्यै
कृतज्ञायै
कामपूजितायै
श्रृङ्गार - रस - सम्पूर्णायै
जयायै
जालन्धरस्थितायै
ओड्याणपीठ - निलयायै
बिन्दुमण्डलवासिर्न्यै ३८०
रहोयागक्रमाराध्यायै
रहस्तर्पणतर्पितायै
सद्यः प्रसादिन्यै
विश्वसाक्षिण्यै
साक्षिवर्जितायै
पडङ्गदेवता - युक्तायै
षाड्गुण्यपरिपूरितायै
नित्यक्लिन्नायै
निरुपमायै
निर्वाणसुख - दायिन्यै ३९०
नित्याषोडशिकारूपायै
श्रीकण्ठार्धशरीरिण्यै
प्रभावत्यै
प्रभारूपायै
प्रसिद्धायै
परमेश्वर्यैं
मूलप्रकृत्यै
अव्यक्तायै  
ओं व्यक्तार्‍यक्त - स्वरूपिण्यै नमः
व्यापिन्यै ४००
विविधाकारायै
विद्याविद्या - स्वरूपिण्यै
महाकामेशनयन - कुमुदा - ह्लाद - कौमुद्यै
भक्तहार्दतमोभेद्र - भानुमद्भानु - संतत्यै
शिवदूत्यै
शिवाराध्यायै
शिवमूर्त्यै
शिवंकर्यै
शिवप्रियायै
शिवपरायै ४१०
शिष्टेष्टायै
शिष्टपूजिताय
अप्रमेयायै
स्वप्रकाशायै
मनोवाचामगोचरायै
चिच्छक्त्यै
चेतनारूपायै
जडशक्त्यै
जडात्मिकायै
गायत्र्यै ४२०
व्याहृत्यै
संध्यायै
द्विजबृन्द - निषेवितायै
तत्त्वासनायै
तस्मै
तुभ्यं
अय्यै
पञ्चकोशान्तर - स्थितायै
निःसीममहिम्ने
नित्ययौवनायै ४३०
मदशालिन्यै
मदघूर्णिय - रक्ताक्ष्यै
मदपाटलञाण्डभुवे
चन्द्रनद्रव - दिग्धाङ्ग्यै
चाम्पेयकुसुम - प्रियायै
कुशलायै
कोमलाकारायै
कुरुकुल्लायै
कुलेश्वर्यैं
कुलकुण्धाभयायै ४४०
कौलमार्ग - तत्पर सेवितायै
कुमारगणनाथाम्बायै
तुष्ट्यै
पुष्ट्यै
ओं मत्यै नमः
धृत्यै
शान्त्यै
स्वस्तिमत्यै
कान्त्यै
नन्दिन्यै ४५०
विध्ननाशिन्यै
तेजोवत्यै
त्रिनयनायै
लोलाक्षी - कामरूपिण्यै
मालिन्यै
हंसिन्यै
मात्रे
मलयाचल - वासिन्यै
सुमुख्यै
नलिन्यै ४६०
सुभुवे
शोभनायै
सुरनायिकायै
कालकण्ठयै
कान्तिमत्यै
क्षोभिण्यै
सूक्ष्मरूषिण्यै
वज्रेश्वर्यै
वामदेव्यै
वयोsवस्था - विवर्जितायै ४७०
सिद्धश्वर्यैं
सिद्धविद्यायै
सिद्धमात्रे
यशस्विन्यै
विशुद्धिचक्रनिलयायै
आरक्तवर्णायै
त्रिलोचनायै
खट्वाङ्गादि - प्रहरणायै
वदनैकसमन्वितायै
पायसान्नप्रियायै ४८०
त्वक्स्थायै
पशुलोकभयङ्यकयै
अमृतादिमहाशक्ति - संवृतायै
डाकिनीश्वर्यैं
अनाहताब्ज - निलयायै
श्यामाभ्यायै
वदनद्वयायै
दंष्ट्रोज्ज्वन्नायै
अक्षमालादिधरायै
रुधिरसंस्थितायै ४९०
कालरात्र्यादिशक्त्यौघवृतायै  
ओं स्निग्धौदन - प्रियांयै नमः
महावीरेन्द्र वरदायै
राकिण्यम्बा - स्वरूपिण्यै
मणिपूराव्ज - निलायायै
वदनत्रय - संयुतायै
वज्रादिकायुधोपेतायै
डामर्यादिभि - रावृत्तायै
रक्तवर्णायै
मांसनिष्ठायै ५००
गुडान्नप्रीत - मानसायै
समस्तभक्त - सुखदायै
लाकिन्यम्बा - स्वरूपिण्यै
स्वाधिष्ठानाम्बुजगतांयै
चतुर्वक्त्रमनोहरायै
शूलाद्यायुध - सम्पन्नायै
पीतवर्णायै
अतिगर्वितायै
मेदोनिष्ठायै
मधुप्रीतायै ५१०
बन्धिन्यादि - समन्वितायै
दध्यन्नासक्त - हृदयायै
काकिनीरूप - धारिण्यै
मूलाधाराम्बुजारूढायै
पञ्चवक्त्रायै
अस्थिसंस्थियै
अङूकुशादि - प्रहरणायै
वरदादि - निषेवितायै
मुद्गौदनासक्तचित्तायै
साकिन्यम्बा - स्वरूपिण्यै ५२०
आज्ञाचक्राब्ज - निलयायै
शुक्लवर्णायै
षडाननायै
मज्जासंस्थायै
हंसवती - मुख्यशक्ति - समन्वितायै
हरीद्रान्नेक - रसिकायै
हाकिनीरूप - धारिण्यै
सहस्त्रदल - पद्मस्थायै
सवौंवर्णोप - शोभितायै
सर्वायुध - धरायै ५३०
शुक्लसंस्थितायै
सर्वतोमुख्यै
सर्वौंदनप्रीत - चित्तायै
याकिन्यम्बा - स्वरूपिण्यै
स्वाहा
स्वधा
अमत्यै
मेधायै
श्रुत्यै
ओं स्मृत्यै नमः ५४०
अनुत्तमायै
पुण्यकीर्त्यै
पुण्यलभायै
पुण्यश्रवण - कीर्तनायै
पुलोमजार्चितायै
बन्धमोचन्यै
बर्बरालकायै
विमर्शरूपिण्यै
विद्यायै
बियदादि - जगत्प्रसुवे ५५०
सर्वव्याधि - प्रशमन्यै
सर्वमृत्यु - निवारिण्यै
अग्रगण्यायै
अचिन्त्य - रूपायै
कलिकल्मष - नाशिन्यै
कात्यायन्यै
कालहन्त्र्यै
कमलाक्षनिषेवितायै
ताम्बूलपूरितमुख्यै
दाडिमोकुसुम - प्रभायै ५६०
मृगाक्ष्यै
मोहिन्यै
मुख्यायै
मृडान्यै
मित्ररूपिण्यै
नित्यतृप्तायै
भक्तनिधये
नियन्त्र्यै
निखिलेश्वयै
मैत्र्यादिवासना - लभ्यायै ५७०
महाप्रलय - साक्षिण्यै
परस्यै शक्त्यै
परायै निष्ठायै
प्रज्ञानघन - रूपिण्यै
माध्वीपानालसायै
मत्तायै
मातृकावर्ण - रूपिण्यै
महाकैलास - निलयायै
मृणाल - मृदुदोर्लतायै
महनीयायै ५८०
दयामूर्त्यैं
महासाम्राज्य - शालिन्यै
आत्मविद्यायै
महाविद्यायै
श्रीविद्यायै
कामसेवितायै
श्रीषोडशाक्षरी - विद्यायै
ओं त्रिकूटायै नमः
कामकोटिकायै
कटाक्षकिङ्करीभूत - कमलाकोटिसेवितायै ५९०
शिरः स्थितायै
चन्द्रनिभायै
भालस्थायै
इन्द्रधनु - प्रभायै
हृदयस्थायै
रविप्रख्यायै
त्रिकोणान्तर - दीपिकायै
दाक्षायण्यै
दैत्यहन्त्रयै
दक्षयज्ञविनाशिन्यै ६००
दरान्दोलितःदीर्घाक्ष्यै
दरहासीज्ज्वलन्मुख्यै
गुरुमूर्तये
गुणनिधये
गोमात्रे
गुहजन्मभुवे
देवेश्यै
दण्डनीतिस्थायै
दहराकाश - रूपिण्यै
प्रतिपन्मुख्यराकान्त - तिथि - मण्डलपूजितायै ६१०
कलात्मिकयै
कलानाथायै
काव्यालाप - विमोदिन्यै
सचामर - रमावाणी - सव्य -
दक्षिण - सेवितायै
आदिशक्त्यै
अभेयायै
परमायै
पावनाकृतयै
अनेककोटि - ब्रह्माण्ड - जनन्यै ६२०
दिव्यंविग्रहायै
क्लींकार्यै
केवलायै
गुह्यायै
केवल्यपद - दायिन्यै
त्रिपुरायै
त्रिजगद्वन्द्यायै
त्रिमूर्तये
त्रिदशेस्वर्यै
त्र्यक्षर्यै ६३०
दिव्यगन्धाढ्यायै
सिन्दूर - तिलकाञ्चितायै
ओं उमायै नमः
शैलेन्द्रतनयायै
गौर्यै
गन्धर्वसेवितायै
विश्वगर्भायै
स्वर्णगर्भायै
अवरदायै
वागधीश्वर्यै ६४०
ध्यानगम्यायै
अपरिच्छेद्यायै
ज्ञानदायै
ज्ञानविग्रहायै
सर्ववेदान्त - संवेद्यायै
सत्यानन्द - स्वरूपिण्यै
लोपामुद्रार्चितायै
लीलाक्लृप्त - ब्रह्माण्ड - मण्डलायै
अदृश्यायै
दृश्यरहितायै ६५०
विज्ञात्र्यै
वेद्यवर्जितायै
योगिन्यै
योगदायै
योग्यायै
योगानन्दायै
युगन्धरायै
इच्छाशक्ति - ज्ञानशक्ति - क्रियाशक्ति - स्वरूपिण्यै
सर्वाधारायै
सुप्रतिष्ठायै ६६०
सदसद्रूप - धारिण्यै
अष्टमूर्त्यै
अजाजेत्र्यै
लोकयात्रा - विधायिन्यै
एकाकिन्यै
भूमरूपायै
निर्द्वैतायै
द्वैतवर्जितायै
अन्नदायै
वसुदायै ६७०
वृद्धायै
ब्रह्मात्मैक्य - स्वरूपिण्यै
बृहत्यै
ब्राह्मण्यै
ब्राह्मयै
ब्रह्मानन्दायै
बलिप्रियायै
भाषारूपायै
ओं बृहत्सेनायै नमः
भावाभाव - विवर्जितायै ६८०
सुखाराध्यायै
शुभकार्यै
शोभनायै सुलभायै गत्यै
राजराजेश्वयै
राजदायिन्यै
राज्यवल्लभायै
राजत्कृपायै
राजपीठनिवोशित - निजाश्रितायै
राज्यलक्ष्म्यै
कोशानाथायै ६९०
चतुरङ्गबलेश्वर्यै
साम्राज्य - दायिन्यै
सत्यसन्धायै
सागरमेखलायै
दीक्षितायै
दैत्यशमन्यै
सर्वलोकवशंकर्यै
सर्वार्थदात्र्यै
सावित्र्यै
सच्चिदानन्द - रूपिण्यै ७००
देशकालापरिच्छिन्नायै
सर्वगायै
सर्वमोहिन्यै
सरस्वत्यै
शास्त्रमथ्यै
गुहाभ्बायै
गुह्यरूपिण्यै
सर्वोपाधि - विनिर्मुक्तायै
सदाशिव - पतिव्रतायै
सम्प्रदायेश्वर्यै ७१०
साधुने
यै नमः
गुरुमण्डल - रूपिण्यै
कुलीत्तीर्णायै
भागाराध्यायै
मायायै
मधुमत्यै
मह्यें
गणाम्बायै
गुह्यकाराध्यायै ७२०
कोमलाङ्ग्यै
गुरुप्रियायै
स्वतन्त्रायै
सर्वतन्त्रेश्यै
दक्षिणामूर्ति - रूपिण्यै
ओं सनकादि - समाराध्यायै नमः
शिवज्ञान - प्रदायिन्यै
चित्कलायै
आनन्द - कलिकायै
प्रेमरूपायै ७३०
प्रियंकर्यै
नामपारायण - प्रीतायै
नन्दिविद्यायै
नटेश्वर्यै
मिथ्याजग - दधिष्ठानायै
मुक्तिदायै
मुक्तिरूपिण्यै
लास्यप्रियायै
लयकर्यै
लज्जायै ७४०
रम्भादि - वन्दितायै
भवदाव - दवानलायै
दौर्भाग्यतूल - वातूलायै
जराध्वान्त - रविप्रभायै
भाग्याब्धि - चन्द्रिकायै
भक्तचित्तकेकि - घनाघनायै
रोगपर्वत - दम्भोलये
मृत्युदारु - कुठारिकायै
महेश्वर्यै
महाकाल्यै ७५०
महाग्रासायै
महाशनायै
अपर्णायै
चण्डिकायै
चण्डमुण्डासुर - निषूदिन्यै
क्षराक्षरात्मिकायै
सर्वलोकेश्यै
विश्वधारिण्यै
विश्वधारिण्यै
त्रिवर्गदात्र्यै ७६०
सुभगायै
त्र्यम्बकायै
त्रिगणात्मिकायै
स्वर्गापवर्गदायै
शुद्धायै
जपापुष्प - निभाकृतये
ओजोवत्यै
द्युतिधरायै
यज्ञरूपायै
प्रियव्रतायै ७७०
दुराराध्यायै
दुराधर्षायै
पाटलीकुसुम - प्रियायै
ओं महत्यै नमः
मेरुनिलयायै
मन्दारकुसुमप्रियायै
वीराराध्यायै
विराङ्रूपायै
विरजसे
विश्वतोमुख्यै ७८०
प्रत्यग्रूपायै
पराकाशायै
प्राणदायै
प्राणरूपिण्यै
मार्तण्डभैरवाराध्यायै
मन्त्रिणीन्यस्त - राज्यधुरे
त्रिपुरेश्यै
जयत्सेनायै
निस्त्रैगुण्यायै
परापरायै ७९०
सत्यज्ञानानन्द - रूपायै
सामरस्य - परायणायै
कपर्दिन्यै
कलामालायै
कामुदुधे
कामरूपिण्यै
कलानिधये
काव्यकलायै
रसज्ञायै
रसशेवधये ८००
पुष्टायै
पुरातनायै
पूज्यायै
पुष्करायै
पुष्करेक्षणायै
परस्मै ज्योतिषे
परस्मै धाम्ने
परमाणवे
परात्परायै
पाशहस्तायै ८१०
पाशहन्त्र्यै
परमन्त्र - विभेदिन्यै
मूर्तायै
अमूर्तायै
अनित्यतृप्तायै
मुनिमानस - हंसिकायै
सत्यव्रतायै
सत्यरूपायै
सर्वान्तर्यामिण्यै
सत्यै ८२०
ब्रह्माण्यै
ब्रह्मणे
ओं जनन्यै नमः
बहुरूपायै
बुधार्चितायै
प्रसवित्र्यै
प्रचण्डायै
आज्ञायै
प्रतिष्ठायै
प्रकटाकृतये ८३०
प्राणेश्वर्यै
प्राणदात्र्यै
पञ्चाशत्पीठ - रूपिण्यै
विशृङ्खलायै
विविक्तस्थायै
वीरमात्रे
विरत्प्रसुवे
मुकुन्दायै
मुक्ति - निलयायै
मूलविग्रह - रूपिण्यै ८४०
भावज्ञायै
भवरोगध्न्यै
भवचक्र - प्रवर्तिन्यै
छन्दः सारायै
शास्त्रसारायै
मन्त्रसारायै
तलोदर्यै
उदारकीर्तये
उद्दामवैभवायै
वर्णरूपिण्यै ८५०
जन्म - मृत्यु - जरा - तप्त - जन - विश्रान्ति - दायिन्यै
सर्वोपनिषदुद्घुष्टायै
शान्त्यतीत - कलात्मिकायै
गम्भीरायै
गगनान्तस्थायै
गर्वितायै
गानलोलुपायै
कल्पनारहितायै
काष्ठायै
अकान्तायै ८६०
कान्तार्धविग्रहायै
कार्यकारण - निर्मुक्तायै
कामकेलितरङ्गितायै
कनत्कनक - ताटङ्कायै
लीलाविग्रहधारिण्यै
अजायै
क्षयविनिर्मुक्तायै
मुग्धायै
क्षिप्रप्रसादिन्यै
ओं अन्तर्मुख - समाराघ्यायै नमः ८७०
बहिर्मुख - सुदुर्लभायै
त्रय्यै
त्रिवर्गनिलयायै
त्रिस्थायै
त्रिपुरमालिन्यै
निरामयायै
निरालम्बायै
स्वात्मारामायै
सुधासृत्यै
ससारपङ्कनिर्मग्न - समुद्ध - रणपण्डितायै ८८०
यज्ञप्रियायै
यज्ञकर्त्र्यै
यजमानस्वरूपिण्यै
धर्माधारायै
धनाध्यक्षायै
धनधान्य - विवर्धिन्यै
विप्रप्रियायै
विप्ररूपायै
विश्वभ्रमण - कारिण्यै
विश्वग्रासायै ८९०
विद्रुमाभायै
वैष्णव्यै
विष्णुरूपिण्यै
अयोन्यै
योनिनिलयायै
कूटस्थायै
कुलरूपिण्यै
वीरगोष्ठी - प्रियायै
वीरायै
नैष्कर्म्मायै ९००
नादरूपिण्यै
विज्ञानकलनायै
कल्यायै
विदग्धायै
बैदन्वासनायै
तत्त्वाधिकायै
तत्त्वमय्यै
तत्त्वमर्थ - स्वरूपिण्यै
सामगान - प्रियायै
सोम्यायै ९१०
सदाशिव - कुटुम्बिन्यै
सव्यापसव्य - मार्गस्थायै
सर्वापद्विनिवारिण्यै
स्वस्थायै
स्वभावमधुरायै
धीरायै
ओं धीरसमर्चितायै नमः
चैतन्यार्ध्य - समाराध्यायै
चैतन्यकुसुम - प्रियायै
सदोदितायै ९२०
सदातुष्टायै
तरुणादित्य - पाटलायै
दक्षिणादक्षिणाराध्यायै
दरस्मेर - मुखाम्बुजायै
कौलिनीकेवलायै
अनर्घ्य - कैवल्यपद - दायिन्यै
स्तोत्रप्रियायै
स्तुतिमत्यै
श्रुतिसंस्तुत - वैभवायै
मनस्विन्यै ९३०
मानवत्यै
महेश्यै
मङ्गलाकृतये
विश्वमात्रे
जगद्धात्र्यै
विशालाक्ष्यै
विरागिण्यै
प्रगल्भायै
परमोदारायै
परामोदायै ९४०
मनोमय्यै
व्योमकेश्यै
विमानस्थायै
वज्रिण्यै
वामकेश्वर्यै
पञ्चयज्ञप्रियायै
पञ्चप्रेत-मञ्चधिशायिन्यै
पञ्चम्यै
पञ्चभूतेश्यै
पञ्चसङ्कयोपचारिण्यै ९५०
शाश्वत्यै
शाश्वतेश्वर्यायै
शर्मदायै
शम्भुमोहिन्यै
धरायै
धरसुतायै
धन्यायै
धर्मिण्यै
धर्मवर्धिन्यै
लोकातीतायै ९६०
गुणातीतायै
सर्वातीतायै
शमात्मिकायै
ओं बन्धूककुसुम - प्रख्यायै नमः
बालायै
लीलाविनोदिन्यै
सुमङ्गल्यै
सुखकार्यै
सेवेषाढ्यायै
सुवासिन्यै ९७०
सुवासिन्यर्चन - प्रीतायै
आशोभनायै
शुद्धमानसायै
बिन्दुतर्पण - सन्तुष्टायै
पूर्वजायै
त्रिपुराम्बिकायै
दशमुद्रा - समाराध्यायै
त्रिपुराश्रीवशंकर्यै
ज्ञानमुद्रायै
ज्ञानगम्यायै ९८०
ज्ञानज्ञेय - स्वरूपिण्यै
योनिमुद्रायै
त्रिखण्डेश्यै
त्रिगुणायै
अम्बायै
त्रिकोणगायै
अनघायै
अद्भुतचारित्रायै
वांछितार्थ - प्रदायिन्यै
अभ्यासातिशयज्ञातायै ९९०
षड्ध्वातीत - रूपिण्यै
अव्याज - करुणामूर्तये
अज्ञानध्वान्त - दीपिकायै
आबालगोप - विदितायै
सर्वानुल्लध्य - शासनायै
श्रीचक्रराज - निलयायै
श्रीमत् त्रिपुरसुन्दर्यै
श्रीशिवायै
शिवशक्तयैक्य - रूपिण्यै
ललिताम्बिकायै नमः १०००

इति श्रीललितासहस्त्रनामावलिः संपूर्णा ॥

Translation - भाषांतर
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Last Updated : 2018-01-11T20:17:26.7500000

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