TransLiteral Foundation
Don't follow traditions blindly or don't assume a superstition either.
Don't be intentionally ignorant. Ask us!! Make Informed Religious Decisions!!

तृतीयप्रपाठकः - चतुर्थी दशतिः

यज्ञ, अनुष्ठान आणि हवन संबंधीचे मन्त्र सामवेदात सांगितले आहेत. सर्व वेदांमध्ये हा सर्वात छोटा वेद आहे.


चतुर्थी दशतिः
अतीहि मन्युषाविणं सुषुवांसमुपेरय ।
अस्य रातौ सुतं पिब ॥२२३॥
कदु प्रचेतसे महे वचो देवाय शस्यते ।
तदिध्यस्य वर्धनं ॥२२४॥
उक्थं च न शस्यमानं नागो रयिरा चिकेत ।
न गायत्रं गीयमानं ॥२२५॥
इन्द्र उक्थेभिर्मन्दिष्ठो वाजानां च वाजपतिः ।
हरिवान्त्सुतानां सखा ॥२२६॥
आ याह्युप नः सुतं वाजेभिर्मा हृणीयथाः ।
महां इव युवजानिः ॥२२७॥
कदा वसो स्तोत्रं हर्यत आ अव श्मशा रुधद्वाः ।
दीर्घं सुतं वाताप्याय ॥२२८॥
ब्राह्मणादिन्द्र राधसः पिबा सोममृतूं रनु ।
तवेदं सख्यमस्तृतं ॥२२९॥
वयं घा ते अपि स्मसि स्तोतार इन्द्र गिर्वणः ।
त्वं नो जिन्व सोमपाः ॥२३०॥
एन्द्र पृक्षु कासु चिन्नृम्णं तनूषु धेहि नः ।
सत्राजिदुग्र प्ॐस्यं ॥२३१॥
एवा ह्यसि वीरयुरेवा शूर उत स्थिरः ।
एवा ते राध्यं मनः ॥२३२॥

Translation - भाषांतर
N/A

References : N/A
Last Updated : 2016-11-11T12:48:10.9830000

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.

हरिश्र्चंद्र (वैधस त्रैशंकव)

  • n. एक सुविख्यात इक्ष्वाकुवंशीय राजा, जो त्रिशंकु राजा का पुत्र था । इसकी माता का नाम सत्यवती था [म. स. ११.१३९*] । देवराज वसिष्ठ इसका गुरु था । शैब्या तारामती इसकी पत्‍नी थी [दे. भा. ७.१८]; रोहित १. देखिये । 
  • वैदिक साहित्य में n. इस साहित्य में इसे ‘वैधस’ [वेधस् राजा का वंशज], एवं ‘ऐक्ष्वाक’ [इक्ष्वाकु राजा का वंशज] कहा गया है । ऐतरेय ब्राह्मण में इसकी कुल सौ पत्‍नियाँ होने का निर्देश प्राप्त है, एवं वरुण देवता को अपना रोहित नामक पुत्र बलि के रूप में प्रदान करने के इसके आश्वासन का अस्पष्ट निर्देश वहाँ प्राप्त है [ऐ. ब्रा. ७.१४.२];[ सां. श्रौ. १५.१७] 
  • महाभारत में n. इस ग्रंथ में इसे समस्त भूपालों का सम्राट् कहा गया है, एवं अपने जैत्र नामक रथ में बैठ अपने शस्त्रों के प्रताप से सातों द्वीपों पर विजय प्राप्त करने का निर्देश वहाँ प्राप्त है । इसके द्वारा किये गये राजसूय यज्ञ के कारण इसे इंद्रसभा में स्थान प्राप्त हुआ था, एवं इसके ही उदाहरण से प्रभावित हो कर पाण्डु राजा ने अपने पुत्र युधिष्ठिर से राजसूय यज्ञ करने का संदेश स्वर्ग से भेजा था [म. स. ११.५२-७०] 
  • विश्वामित्र से विरोध n. अपने पिता त्रिशंकु के समान इसका पुरोहित सर्वप्रथम विश्वामित्र ही था । किन्तु आगे चल कर इक्ष्वाकुवंश के भूतपूर्व पुरोहित वसिष्ठ देवराज की प्रेरणा से अपने राजसूय यज्ञ के समय इसने विश्वामित्र ऋषि का अपमान किया । पश्चात् इस अपमान के कारण विश्वामित्र ने इसका पौरोहित्य छोड़ दिया, एवं देवराज वसिष्ठ पुनः एक बार इसका पुरोहित बन गया (विश्वामित्र देखिये) । 
More meanings
RANDOM WORD

Did you know?

मंत्राग्नी आणि भडाग्नी मध्ये म्हणजे काय? ते केव्हां देतात?
Category : Hindu - Traditions
RANDOM QUESTION
Don't follow traditions blindly or ignore them. Don't assume a superstition either. Don't be intentionally ignorant. Ask us!!
Hindu customs are all about Symbolism. Let us tell you the thought behind those traditions.
Make Informed Religious decisions.

Featured site

Ved - Puran
Ved and Puran in audio format.