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काव्यालंकारः

काव्यालंकारः

प्रस्तुत काव्यालंकार ग्रंथ सातव्या शताब्दीत लिहीला गेला.


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References : N/A
Last Updated : 2018-12-05T18:58:04.0500000

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शरभंग

  • n. गौतम कुलोत्पन्न एक ब्रह्मर्षि, जो दंडकारण्य में तप करता था । दंडकारण्य में गोदावरी नदी के तट पर इसका आश्रम था [म. व. ८३.३९, २६१.४०] । वाल्मीकि रामायण में इसका आश्रम मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित होने का निर्देश प्राप्त है [वा. रा. अर. ५.३६] । किंतु वहाँ ‘मंदाकिनी’ का संकेत ‘गोदावरी’ नदी की ओर ही होना संभव अधिक प्रतीत होता है । महाभारत में अन्यत्र इसका आश्रमस्थान उत्तराखंड में बताया गया है [म. व. ८८.८ पाठ.] 
  • तपःसामर्थ्य n. विराध राक्षस के कथनानुसार, राम दशरथि अपने वनवासकाल में इससे मिलने के लिए इसके आश्रम में आया था । उस समय इसके तपःसामर्थ्य से प्रसन्न हो कर, इंद्र स्वयं अपना रथ ले कर इसे ब्रह्मलोक में ले जाने के लिए उपस्थित हुआ था । किंतु राम के दर्शन की अभिलाषा मन में रखनेवाले इस ऋषि ने इंद्र का यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया, एवं यह राम की प्रतीक्षा करते आश्रम में ही बैठा रहा। 
  • राम से भेंट n. राम के इसके आश्रम में आते ही, इसने उसका उचित आदर-सत्कार किया, एवं अपने तपःसामर्थ्य की सहायता से प्राप्त होनेवाले स्वर्गलोक एवं ब्रह्मलोक को स्वीकार करने की प्रार्थना राम से इसने की। किंतु राम ने इसका यह प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया, एवं स्वयं के ही तपःसाधन से स्वर्गलोक प्राप्त करने का अपना निर्धार प्रकट किया । तदुपरांत राम ने इससे तपस्या के लिए सुयोग्य स्थान दर्शाने की प्रार्थना की। मंदाकिनी नदी के तट पर सुतीक्ष्ण ऋषि के आश्रम के पास तपस्या करने की सूचना राम को इसने प्रदान की। पश्चात् इसने अग्नि में अपना शरीर झोंक दिया, एवं इस प्रकार यह स्वर्गलोक चला गया [वा. रा. अर.५] 
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Category : Hindu - Beliefs
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