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अध्याय ३ - सप्तांशचक्र

मानसागरी - अध्याय ३ - सप्तांशचक्र

सृष्टीचमत्काराची कारणे समजून घेण्याची जिज्ञासा तृप्त करण्यासाठी प्राचीन भारतातील बुद्धिमान ऋषीमुनी, महर्षींनी नानाविध शास्त्रे जगाला उपलब्ध करून दिली आहेत, त्यापैकीच एक ज्योतिषशास्त्र होय.

The horoscope is a stylized map of the planets including sun and moon over a specific location at a particular moment in time, in the sky.


अब सप्तांशको कहते हैं - राशिका सातवां भाग सप्तांश होता है, सो विषमराशिमें प्रथम अपनी राशिसे गणना करै और समराशिमें अपनी राशिसे सातवीं राशिका प्रथम सप्तांश जाने. यथा मेषमें प्रथम मेषका एवं मिथुनमें प्रथम मिथुनका और वृषमें वृषसे सातवीं वृश्चिकका प्रथम सप्तांश होता है । इसी प्रकार समविषमराशिके हिसाबसे द्वादराशियोंमें सप्तांश विचार करै जैसा चक्रमें स्पष्ट है सो देखना ॥१॥

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Last Updated : January 22, 2014

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