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बनमें देख्या दोय बनवास...

वियोग - बनमें देख्या दोय बनवास...

भगवद्वियोगकी पीडाका चित्रण ’वियोग’ शीर्षकके अंतर्गत पदोंमें है ।


बनमें देख्या दोय बनवासी, वाँरो मुख देख्याँ दु:ख जासी ए माय !

भेज-पत्रके वस्त्र पहिरे, वे तो अपने नगर होय आसी ए माय !

नयनोंसे सखी निरखन लायक, वाने कौन किया बनवासी ए माय !

धन वाँरी मात पिता वाँरा धन है, वे तो हिवड़ो फाट मर जासी ए माय !

तुलसीदास आस रघुवरकी, वारे चरणकमल चित लासी ए माय !

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Last Updated : January 30, 2018

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