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संत ज्ञानेश्वरांनि हे म्हटले आहे का ?

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''गीता में वेदों के तीनों काण्ड स्पष्ट किये गये हैं अतः वह मूर्तिमान वेदरूप हैं और उदारता में तो वह वेद से भी अधिक है | अगर कोई दूसरों को गीताग्रंथ देता है तो जानो कि उसने लोगों के लिए मोक्षसुख का सदाव्रत खोला है | गीतारूपी माता से मनुष्यरूपी बच्चे वियुक्त होकर भटक रहे हैं | अतः उनका मिलन कराना यह तो सर्व सज्जनों का मुख्य धर्म है |'' जर नाही तर कृपया त्यांनी जे भगवद गीतेवर मत सांगितले आहे ते सांगण्याची कृपा करावी. ज्ञानोबा तुकाराम !!
asked Apr 28, 2016 in Vedic Literature by Manohar Krishna Pati (60 points)

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शके बाराशतें बारोत्तरें । तैं टीका केली ज्ञानेश्वरें । सच्चिदानंदबाबा आदरें । लेखकु जाहला ॥ १८११ ॥

ज्ञानेश्वरीतील हा श्लोक पहा.

ज्ञानेश्वरांनी फक्त टीका केली कोठेही आपले मत व्यक्त केलेले नाही.
answered Jul 5, 2016 by TransLiteral (10,920 points)
selected Aug 24, 2016 by TransLiteral Admin
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