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ऋतुसंहार

  • ऋतुसंहारः
    कालिदास अपनी अलंकार युक्त सुंदर सरल और मधुर भाषा के लिये विशेष रूप से जाने जाते हैं। ’ऋतुसंहार’नामक काव्यमे ऋतु वर्णन अद्वितीय हैं और उनकी उपमाएं बेम..
  • ऋतुसंहारः - अथ ग्रीष्मः
    कालिदास अपनी अलंकार युक्त सुंदर सरल और मधुर भाषा के लिये विशेष रूप से जाने जाते हैं। ’ऋतुसंहार’नामक काव्यमे ऋतु वर्णन अद्वितीय हैं और उनकी उपमाएं बेम..
  • ऋतुसंहारः - अथ वर्षाः
    कालिदास अपनी अलंकार युक्त सुंदर सरल और मधुर भाषा के लिये विशेष रूप से जाने जाते हैं। ’ऋतुसंहार’मे ऋतु वर्णन अद्वितीय हैं और उनकी उपमाएं बेमिसाल है।
  • ऋतुसंहारः - अथ शरदः
    कालिदास अपनी अलंकार युक्त सुंदर सरल और मधुर भाषा के लिये विशेष रूप से जाने जाते हैं। ’ऋतुसंहार’मे ऋतु वर्णन अद्वितीय हैं और उनकी उपमाएं बेमिसाल है।
  • ऋतुसंहारः - अथ हेमन्तः
    कालिदास अपनी अलंकार युक्त सुंदर सरल और मधुर भाषा के लिये विशेष रूप से जाने जाते हैं। ’ऋतुसंहार’मे ऋतु वर्णन अद्वितीय हैं और उनकी उपमाएं बेमिसाल है।
  • ऋतुसंहारः - अथ शिशिरः
    कालिदास अपनी अलंकार युक्त सुंदर सरल और मधुर भाषा के लिये विशेष रूप से जाने जाते हैं। ’ऋतुसंहार’मे ऋतु वर्णन अद्वितीय हैं और उनकी उपमाएं बेमिसाल है।
  • ऋतुसंहारः - अथ वसन्तः
    कालिदास अपनी अलंकार युक्त सुंदर सरल और मधुर भाषा के लिये विशेष रूप से जाने जाते हैं। ’ऋतुसंहार’मे ऋतु वर्णन अद्वितीय हैं और उनकी उपमाएं बेमिसाल है।
: Folder : Page : Word/Phrase : Person


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इनाम

  • न. 
  • कोणत्याहि अटीशिवाय शाश्वत , वंशपरंपरेची स्थावर अशी देणगी ; वृत्ति ; इनामांत पुढील प्रकार आहेत . - वतनी ( सनदी ) व गांवनिसबत . वतनींत गैरउपयोगी ( न्हावी , सुतार , चांभार , चौघुला , शेट्या , मांग , कुंभार , पोतदार , महाजन , कुडबुडे जोशी इ० ) व उपयोगी ( उपाध्याय , गुरव , गांवज्योतिषी , जंगम , काजी , मुलाणा , मुजावर इ० ) परगणे वतनदार ( देशमुख , देशपांडे , देशकुलकर्णी , नाडगौडा , नाडकर्णी , सरदेसाई , सरदेशपांडे , सरदेशमुख , सरपाटील , निरखीदार , देशगत , घाटपांडे , देसाई ), गांवनौकर ( पाटील , कुलकर्णी , मतादार , माधवी , महार , तराळ , बळीकर इ० ), क्षेत्रोपाध्ये . गांवनिसबत ( पासोडी , देवस्थान , हाडोळी , मावळी , धर्मादाय , देणगी , वतनदारी इ० ). सनदी म्हणजे सरकारी करापासून मुक्त व कायमचें दिल्याबद्दल सनद मिळतें तें . शराकती दुमाला म्हणजे गांवांतील उत्पन्नांतून गांवकामगाराचा खर्च वजा जातां बाकी राहणार्‍या उत्पन्नांत सरकारची हिस्सेरस्सी असते ती . शिवाय अग्रहार , भाकरी , चोळीबांगडी , देवस्थान , कदीम , जदीद , जात , जुडी , कोल्हाटी , मळीकी , राजकीय , साधणूक , शेतसनदी , योगक्षेम , इसाफत , नौकरी , वतनीवजीफा , आलतमघा , इ० इ० ऐन इनामतीमध्यें ब्राह्मणांचीं अग्रहारें व बादशहाचे पीर आणि थडगीं , मशिदी आणि देवस्थानें , फकीर इनाम , मोईन , काजी - मुलाणा , फकीर - तपस्वी , अन्नछत्र वगैरे बाबी येत . - भाअ १८३३ . १३८ . 
  • देव , ब्राह्मण वगैरेंना दिलेली भूमि वगैरे . 
  • मालकी हक्क न देतां देणें , घेणें , खाणें , सोडणें . हा माड यानें इनाम खाल्ला . आम्ही गाईचें दूध काढीत नाहीं , वासरे इनाम पितात . 
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If the rituals after the death are not performed what are the consequences?
Category : Hindu - Puja Vidhi
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