कार्तिक कृष्णपक्ष व्रत - दम्पत्यष्टमी

व्रतसे ज्ञानशक्ति, विचारशक्ति, बुद्धि, श्रद्धा, मेधा, भक्ति तथा पवित्रताकी वृद्धि होती है ।


दम्पत्यष्टमी

( हेमाद्रि ) -

पुत्रकी कामनावले स्त्री - पुरुषोंको चाहिये कि वे कार्तिक कृष्णाष्टमीको डाभकी पार्वती और शिव बनाकर उनका स्त्रान, गन्ध, अक्षत, पुष्प और नैवेद्यसे पूजन करें और उनके समीपमें ब्राह्मणका पूजन करके उसे दक्षिणा दें । ऐसा करनेसे पुत्रकी प्राप्ति होती है । इस व्रतमें चन्द्रोदयव्यापिनी तिथि लेनी चाहिये । यदि वह दो दिन हो या दोनों ही दिन न हो तो दूसरे दिन व्रत करना चाहिये ।

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Last Updated : January 21, 2009

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