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संस्कृत सूची|संस्कृत साहित्य|पुस्तकं|धर्मसिंधु|तृतीय परिच्छेद : पूर्वार्ध ५|
वारशूलः

धर्मसिंधु - वारशूलः

हिंदूंचे ऐहिक, धार्मिक, नैतिक अशा विषयात नियंत्रण करावे आणि त्यांना इह-परलोकी सुखाची प्राप्ती व्हावी ह्याच अत्यंत उदात्त हेतूने प्रेरित होउन श्री. काशीनाथशास्त्री उपाध्याय यांनी ’धर्मसिंधु’ हा ग्रंथ रचला आहे.

This 'Dharmasindhu' grantha was written by Pt. Kashinathashastree Upadhyay, in the year 1790-91.


वारशूलः

वारशूलःसोमशशीप्राच्यामीज्यस्तुदक्षिणे ६ रविशुक्रौप्रतीच्यास्यादुदीच्यांबुधमङ्गलौ ।

पूर्वादिदिक्षुमेषाद्याःक्रमातत्रिश्चन्द्रराशयः ७ संमुखोदक्षिणोऽब्जःसन्पृष्ठेवामेऽतिनिन्दितः ।

दिशियत्रोदेतिशुक्रस्तांदिशंनव्रजेन्नरः ८ नव्रजेत्संमुखेज्ञेपिशुभंपृष्ठोपिवामतः

रेवतीमेषगेचन्द्रेशुक्रान्ध्यात्संमुखव्रजेत् ॥

Translation - भाषांतर
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References : N/A
Last Updated : 2008-06-25T07:20:33.3600000

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यम वैवस्वत

  • n. समस्त प्राणियों का नियमन करने वाला एक देवता, जो मृत्युलोक का अधिष्ठाता माना जाता है । वैदिक ग्रंथों में इसे मृत व्यक्तियों को एकत्र करनेवाला, मृतकों को विश्रामस्थान प्रदान करनेवाला, एवं उनके लिए आवास निर्माण करनेवाला कहा गया है [ऋ.१०.१४, १८];[ अ.वे.१८.२] । ऋग्वेद में इसे मृतकों पर शासन करनेवाला राजा कहा गया है [ऋ.१०.१६] । इसके अश्व स्वर्ण नेत्रों तथा लौह खुरोंवाले हैं ।इसके पिता का नाम विवस्वत् था, एवं इसकी माता का नाम सरण्यु था [ऋ.१०.१४,१७][ऋ.१०. १४.१ ५८.१, ६०.१०, १६४.२] । अथर्ववेद में इसे ‘विवस्वत्’ से भी श्रेष्ठ बताया गया है [अ.वे. १८.२] । उपनिषदों में इसे देवता माना गया है [बृ.उ.१.४.४.११,३.३.९.२१] 
  • पहला राजा n. इसे पहला मनुष्य कहा गया है [अ.वे.८.३.१३] । इसे राजा भी कहा गया है [कौ.उ.४.१५];[ ऋ.९.११३, १०.१४] । शतपथ में इसे दक्षिण का राजा माना गया है [श.ब्रा.२.२.४.२] । ऋग्वेद के तीन सूक्तों में इसका निर्देश हुआ है [ऋ.१०.१४.१३५, १५४] 
  • निवासस्थान n. यम का निवासस्थान आकाश के दूरस्थ स्थानों में था [ऋ.९.११३] । वाजसनेय संहिता में यम एवं उसकी बहन यमी को उच्चतम आकाश में रहनेवाले कहा गया हैं, जहॉं ये दोनों संगीत एवं वीणा के स्वरों से घिरे रहते हैं [वा.सं.१२.६३] । ऋग्वेद में अन्यत्र इसका वासस्थान तीन द्युलोकों में सब से ऊँचा कहा गया है [ऋ.१.३.५-६] 
  • दूत n. यम के दूतों में दो श्वान प्रमुख थे, जो चार नेत्रोंवाले, चौडी नासिकावाले, शबल, उदुंबल (भूरे), एवं सरमा के पुत्र थे [ऋ.१०.१४.१०] । ऋग्वेद में अन्यत्र ‘उलूक’ एवं ‘कपोत’ को भी यम के दूत कहा गया है [ऋ.१०.१६५.४] 
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