हिंदी सूची|हिंदी साहित्य|भजन|दरिया साहब (मारवाड़वाले)|
नाम बिन भाव करन नहिं छूटै...

भजन - नाम बिन भाव करन नहिं छूटै...

हरिभक्त कवियोंकी भक्तिपूर्ण रचनाओंसे जगत्‌को सुख-शांती एवं आनंदकी प्राप्ति होती है।


नाम बिन भाव करन नहिं छूटै ।

साध-संग और राम-भजन बिनु, काल निरन्तर लूटै ॥

मलसेती जो मलको धोवै, सो मल कैसे छूटै ?

प्रेमका साबुन नामका पानी, दोय मिल ताँता टूटै ॥

भेद-अभेद भरमका भाँड़ा, चौड़े, पड़-पड़ फूटै ।

गुरुमुख-सब्द गहै उर-अंतर, सकल भरमसे छूटै ॥

रामका ध्यान तू धर रे प्रानी, अमरतका मेह बूटै ।

जन दरियाव, अरप दे आपा, जरा-मरन तब टूटै ॥

N/A

References : N/A
Last Updated : December 25, 2007

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.
TOP