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प्राणिया उद्धार सर्व हा श...

संत निवृत्तीनाथांचे अभंग - प्राणिया उद्धार सर्व हा श...

संत निवृत्तीनाथ हे संत ज्ञानेश्वर महाराजांचे थोरले बंधू होत.सर्वसामान्य जनतेला संस्कृत भाषेतील भगवद्‌गीता समजत नव्हती म्हणून निवृत्तीनाथांनी ज्ञानेश्वरांना प्राकृत(मराठी)भाषेत लिहीण्यास सांगितली, तीच "ज्ञानेश्वरी".

The eldest, Nivrutti, joined the nath sect and became Nivruttinath. He also become the guru of Dnyaneshwar. He, at the age of fourteen, instructed Dnyaneshwar, who was twelve, to write a commentry on the Bhagavad Gita


संत निवृत्तीनाथांचे अभंग

प्राणिया उद्धार सर्व हा श्रीधर । ब्रह्म हें साचार कृष्णमूर्तीं ॥१ ॥

तें रूप भीवरें पांडुरंग खरें । पुंडलिकनिर्धारें उभे असें ॥ २ ॥

युगे अठ्ठावीस उभा ह्रषीकेश । पुंडलिका सौरस पुरवित ॥ ३ ॥

निवृत्तीचें गुज पांडुरंगाबीज । विश्वजनकाज पुरे कोडें ॥ ४ ॥

Translation - भाषांतर
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Last Updated : 2008-01-23T20:15:42.3700000

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बुध IV.

  • n. एक स्मृतिकार एवं धर्मशास्त्रज्ञ, जिसका निर्देश अपरार्क, कल्पतरु, जीमूतवाहनकृत ‘कालविवेक’ आदि ग्रन्थों में प्राप्त है । इसके द्वार रचि धर्मशास्त्र का ग्रन्थ काफी छोटा है, जिसमें निम्नलिखित विषयों का विवेचन करते हुए, इसने उन पर अपने विचार प्रकट किये हैः---गर्भाधान से लेकर उपनयन तक के समस्त संस्कार, विवाह, तथा उसके प्रकार, पंच-महायज्ञ, श्राद्ध, पाकयज्ञ, हविर्यज्ञ, सोमयाग, एवं ब्राह्मण, क्षत्रिय एवं संन्यासियों के कर्तव्य आदि । बुध के द्वारा रचित उक्त ग्रन्थ प्राचीन नहीं प्रतीत होता । उसके अनुशीलन से यह पता चलता है कि, इसने पूर्ववर्ती धर्मशास्त्रवेत्ताओं द्वारा कथित सामग्री को संग्रहित मात्र किया है । इस ग्रन्थ के सिवाय ‘कल्पयुक्ति’ नामक इसका एक अन्य ग्रन्थ भी प्राप्त है (C.C) 
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