जपके बादकी आठ मुद्राऍं

प्रस्तुत पूजा प्रकरणात भिन्न भिन्न देवी-देवतांचे पूजन, योग्य निषिद्ध फूल यांचे शास्त्र शुद्ध विवेचन आहे.


सुर्य-प्रदक्षिणा-
यानि कानि च पापानि जन्मान्तरकृतानि च।
तानि सर्वाणि नश्यन्तु प्रदक्षिणपदे पदे॥
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भगवान्‍को जपका अर्पण-अन्तमें भगवान्‍को यह वाक्य बोलते हुए जप निवेदित करे-
अनेन गायत्रीजपकर्मणा सर्वान्तर्यामी भगवान् नारायण: प्रीयतां न मम।

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Last Updated : November 27, 2018

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