जलकी सापेक्ष श्रेष्ठता

प्रस्तुत पूजा प्रकरणात भिन्न भिन्न देवी-देवतांचे पूजन, योग्य निषिद्ध फूल यांचे शास्त्र शुद्ध विवेचन आहे.


जलकी सापेक्ष श्रेष्ठता -- कुएँसे निकाले हुए जलसे झरनेका जल, झरनेके जलसे सरोवरका जल, सरोवरके जलसे नदीका जल, नदीके जलसे तीर्थका जल और तीर्थके जलसे गंगाजीका जल अधिक श्रेष्ठ माना गया है --

निपानादुद्भृतं पुण्यं तत: प्रस्त्रवणोदकाम् ।
ततोऽपि सारसं पुण्यं ततो नादेयमुच्यते ॥
तीर्थतोयं तत: पुण्यं गन्गातोयं ततोऽधिकम् ॥

'जहाँ धोबीका शिलापट रखा हो और कपड़ा धोते समय जहाँतक छीटे पड़ते हों, वहाँतकका जलस्थान अपवित्र माना जाता है' --

वासांसि धावतो यत्र पतन्ति जलबिन्दव: ।
तदपुण्यं जलस्थानं रजकस्य शिलांकितम् ॥

इसके पश्चात् नाभिपर्यन्त जलमें जाकर, जलकी ऊपरी सतह हटाकर कान और नाक बंदकर प्रवाहकी ओर या सूर्यकी ओर मुख करके स्नान करे । तीन, पाँच, सात या बारह डुबकियाँ लगाये । डुबकी लगानेके पहले शिखा खोल ले । गंगाके जलमें वस्त्र नहीं निचोड़ना चाहिये । जलमें मल-मूत्र त्यागना और थूकना अनुचित है । शौच-कालका वस्त्र पहनकर तीर्थोमें स्नान करना निषिध्द है ।

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Last Updated : November 25, 2018

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