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श्री महालक्ष्मीचें पद

श्री महालक्ष्मीचें पद

श्रीसद्गुरु कृष्ण जगन्नाथ भट्ट बांदकरमहाराज.


श्री महालक्ष्मीचें पद
महालक्ष्मी निज दर्शन दे मज । होय सुख सहज आत्म निरीक्षिणीं ॥म०॥धृ०॥
तूंचि जिवलगा जीवन त्रिजगा । अखंड सुभगा सदसद्विलक्षणी ॥म०॥१॥
असुनि निराकृति चतुर्भुजाकृति । मूर्ति तुझी भजकांसि सुरक्षणीं ॥म०॥२॥
मातुलिंग विज्ञान गदाधृति । खेट निजानुसंधान क्षणक्षणीं ॥म०॥३॥
अद्वय ब्रह्मानंद प्राशन पात्र करीं बिभ्रती श्री कमलेक्षणी ॥म०॥४॥
चतुराय धवती श्री विष्णु युवती । कृष्ण जगन्नाथ पदीं लीन स्वमोक्षणीं ॥म०॥५॥

Translation - भाषांतर
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Last Updated : 2017-03-10T01:12:33.0670000

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वध्रिमती

  • n. पुरंधि नामक स्त्री का नामान्तर [ऋ. ११६.१२] । अश्वियों की कृपा से इसके पति को पुनः पुरुषत्व प्राप्त हुआ था । आगे चल कर इसे हिरण्यहस्त नामक पुत्र भी उत्पन्न हुआ था [ऋ. १.११६.१३, ११७.२४, ६.६२.७, १०.३९.७, ६५.१२] । लो. तिलक के द्वारा वध्रिमती के इस कथा का अन्वयार्थ अन्य प्रकार से लगाया गया है, जिसमें उन्होंने आर्यों का मूलस्थान उत्तरध्रुव में होने के अपने सिद्धान्त का संकेत पाया है ( आर्यों का मूलस्थान, पृ. २२८ ) । 
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