TransLiteral Foundation
Don't follow traditions blindly or don't assume a superstition either.
Don't be intentionally ignorant. Ask us!! Make Informed Religious Decisions!!
मराठी मुख्य सूची|मराठी साहित्य|गाणी व कविता|बालकवी|
कुरण वायुशीं मंद डोलतें ह...

हरिण आणि गायन - कुरण वायुशीं मंद डोलतें ह...

बालकवी ऊर्फ त्र्यंबक बापूजी ठोंबरे (इ.स. १८९०-इ.स. १९१८) यांचा मराठीतील सर्वश्रेष्ठ निसर्गकवी म्हणून यथार्थ गौरव केला जातो.


हरिण आणि गायन
कुरण वायुशीं मंद डोलतें हें,
मधुनि ओढा हा हळूंहळूं वाहे
वृक्षलतिकांची चोंहिकडे दाटी,
दिसत तेणें रमणीय भूमि मोठीं. १

एक हरिणाचें बाल फिरे त्यांत,
वनश्रीचें उत्तान जणूं चित्त;
उडया मारी क्षण चोंहिकडे पाहे,
मोद कीं हा भूवरी दुजा आहे. २

कुठुनि आली तों उंचशी लकेर
अहा गानाची संथ संथ फार ?
जणूं वायूवर ऊर्मि कोरितें तें;
हरिणबाळा त्या स्वैर मोहवीतें. ३

सर्व गेलीं हरपोनि देहभानें,
बाळ रमलें त्या मधुर गायनानें,
चित्त सगळें कर्णांत सांठवोनी
गुंग झालें त्या पूर्णपणें गानीं, ४

जवळ आलें तें गान, त्या लकेरी
रम्य नांदे भारील दिशा चारी.
चढे धुंदी त्याचीच हरिणाबाला;
हाय ! दुर्दैवी ! तेंचि, घात केला ५

बाण आला तो हाय रे कुठोनी
बसे मर्मीं बाळास त्या रुपोनी,
क्षणीं आलें तें हरिण (बाळ) खालीं;
भिजुनि रक्तानें चिंब तनू झाली ६

मृत्यु नेत्रीं येवोनि उभा ठेला
शब्द उमटेना, कंठ शुष्क झाला
हाय ! काळानें ओढुनिया नेलें.
हरिणबालक तें भाबडें विचारें ! ७

फसो, फसलें चिमुकलें हरिणबाळ
सदा वनवासी अप्रबुद्ध लोल,
परी फसतों सज्ञान असे आम्ही
मोहजाळीं गुंतूनी क्रोधकामीं. ८

Translation - भाषांतर
N/A

References : N/A
Last Updated : 2016-11-11T12:52:51.6870000

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.

धृष्टकेतु

  • n. (सो. ऋक्ष.) चेदिराज शिशुपाल का पुत्र, एवं एक पराक्रमी पांडवपक्षीय राजा । हिरण्यकशिपु का पुत्र अनुह्राद के अंश से यह उत्पन्न हुआ था [म.आ.६१.७] । यह एवं उसके पुत्र अत्यंत शूर थे [म.उ.१६८.८] । इसके साथ रण में युद्ध करने की किसी की हिम्मत न होती थी [म.उ.७८.१४] । भीम के द्वारा शिशुपाल का वध होने पर, धृष्टकेतु को चेदि देश के राजसिंहासन पर अभिषिक्त किया गया [म.स.४२.३१] । यह पहले से ही पांडवों का पक्षपाती एवं मित्र था । पांडवों के वनवास में, यह उन्हें मिलने के लिये गया था [म.व.१३.२] । भारतीय युद्ध शुरु होते ही, पांडवों की ओर से धृष्टकेतु को रणनिमंत्रण दिया गया [म.उ.४.८] । एक अक्षौहिणी सेना के साथ, यह पांडवों के पक्ष में शामिल हुआ [म.उ.१९.७] । इसके पास कांबोज देश के सफेद-काले रंग के अत्युत्कृष्ट अश्व थे । वे भी इसने युद्ध के लिये लाये थे [म.द्रो.२२.१६] । पांडवों के सात सेनापतियों में से एक के पद पर, इसे नियुक्त किया गया था [म.उ.१५४.१०-११] । अर्जुन के रथ का चक्ररक्षण का काम इस पर सौंपा गया था । वह कार्य भी इसने उत्कृष्ट तरह से निभाया [म.भी.१९.१८] । भारतीय युद्ध में, इसने निम्नलिखित प्रतिपक्षीय वीरों से युद्ध कर के पराक्रम दिखा थाः 
RANDOM WORD

Did you know?

नाग आणि नागपंचमी यांचा परस्परसंबंध काय?
Category : Hindu - Traditions
RANDOM QUESTION
Don't follow traditions blindly or ignore them. Don't assume a superstition either. Don't be intentionally ignorant. Ask us!!
Hindu customs are all about Symbolism. Let us tell you the thought behind those traditions.
Make Informed Religious decisions.

Featured site