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संगीत मंदारमाला

संगीत मंदारमाला

मराठी संगीत नाटक ही मराठी रंगभूमीला रामप्रहरी पडलेले एक सुखद स्वप्न होय.


प्रस्तुत नाटकाचे नाटककार आहेत - विद्याधर गोखले
(२३-३-१९६३).


(राग : अहिर भैरव, ताल : त्रिताल)
जय शंकरा ! गंगाधरा !
गिरिजावरा, गौरीहरा !
विपदाहरा, शशिशेखरा !
विष प्राशुनी जगतास या ।
दिधली सुधा करुणाकरा ॥


(राग : देसकार, ताल : त्रिताल)
जयोऽस्तुते हे उषा-देवते ।
देवि दयावति महन्मंगले ।
रुचिर-यौवना रूप सुंदरा ।
जगन्मोहिनी अरुणरंजिते ।


(राग : तोडी, ताल : एकताल)
‘सोऽहम’ हर-डमरु बाजे
उसके सुर तालों के
सुखकारक झूले पर
झूम रहे सरिता-सर
भुवन-त्रय साजे. ॥
डमरू-ओंकार नाद
परमेसरका प्रसाद
उसकीहि महिमसे
गिरी-कंदर गाजे. ॥


(राग : मिश्र खमाज, ताल : रुपक)
तारे नही, ये तो रातको
आतिश भरे मेरे आहनें ।
है लिख दिया आसमां पर
तेरे सितमका माजरा ॥
ओ गुलबदन जादुनयन !

फूलोंसे नाजुक तन मेरा !
फिरभी तेरे नयनोंने क्यों
घायल किया जियरा मोरा ॥
ओ गुलबदन जादुनयन !

कभि कहके कुछ पछताये हम
कभि रहते चुप पछताये हम !
इकही नतीजा ये हुवा-
उलझनसे मेरा दिल भरा ॥
ओ गुलबदन, जादुनयन !

तुझे क्या खबर है ओ बेवफा
आँखोंकी हो तुम रोशनी ।
लग जा गलेसे नाजनीं
दिलभी ये रोशन कर जरा ॥
ओ गुलबदन, जादुनयन !


(राग : सिंधभैरवी, ताल : केदार)
‘बुझावो दीप ए सजनी’ ।
यही है प्यारका पैगाम ॥
जलनेवाले चिरागोंका ।
सुहानी रातमे क्या काम ?
सजनी, आज मिलनकी रात ॥धृ०॥

एक चंद्रमा गगनमें चमके
दुजे हमारे साथ ।
करत नैन मदभरे तुम्हारे
अमृतकी बरसात ॥

गुंज रही है मनकी कोयलिया
मीठी मीठी बात ।
“फिर न कभी आएगी ऐसी
सरस सुहानी रात !” ॥


(राग : बसंतबहार, ताल : एकताल)
बसंतकी बहार आयी
तरुवर, बन-बेलरियाँ
फूल रही डालरियाँ
मोर बोले, ‘कोयलिया
ना बहार छाई’ कलियनसे
भंवरा खेले घुंघटका पट खोले
कली कली मुसकाई
रंग रंग सुख पाय़ी ।


(राग : मिश्र पिलू, ताल : केहेरवा)
हरी मेरो  जीवनप्राण-अधार
और आसरो नाही तुम बिन । तीनो लोक मझार ॥
आपबिना मोहे कछु न सुहावे निरख्यो सब संसार ॥
मीरा कहे मै दासी बावरी । दिज्यौ मत बिसार ॥


(राग : जोगकंस, ताल : त्रिताल)
कोण अससि तू नकळे मजला ।
तू गंगेची अथांग शुचिता
की जननीची मायाममता ?
कोण अससि तू नकळे मजला ॥
भाविकतेचि मंगलगाथा
उदार चरिता अमर देवता
नवा जन्म तू मजला दिधला
काय वदू मी तुज नकळे मजला ॥

१०
(राग : हिंडोल, ताल : त्रिताल)
तारिल हा तुज गिरिजाशंकर ॥
भव चिंताहर मदन-गर्वहर
चंद्र कलाधर नट-राजेश्वर
करिल विजयी तुला महेश्वर ॥

Translation - भाषांतर
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Last Updated : 2016-11-11T12:53:03.0170000

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