TransLiteral Foundation
Don't follow traditions blindly or don't assume a superstition either.
Don't be intentionally ignorant. Ask us!! Make Informed Religious Decisions!!
संस्कृत सूची|संस्कृत साहित्य|वेदः|ऋग्वेदः|मण्डल १०|
सूक्तं १२३

मण्डल १० - सूक्तं १२३

ऋग्वेद फार प्राचीन वेद आहे. यात १० मंडल आणि १०५५२ मंत्र आहेत. ऋग्वेद म्हणजे ऋषींनी देवतांची केलेली प्रार्थना आणि स्तुति.


सूक्तं १२३
अयं वेनश्चोदयत्पृश्निगर्भा ज्योतिर्जरायू रजसो विमाने ।
इममपां संगमे सूर्यस्य शिशुं न विप्रा मतिभी रिहन्ति ॥१॥
समुद्रादूर्मिमुदियर्ति वेनो नभोजाः पृष्ठं हर्यतस्य दर्शि ।
ऋतस्य सानावधि विष्टपि भ्राट् समानं योनिमभ्यनूषत व्राः ॥२॥
समानं पूर्वीरभि वावशानास्तिष्ठन्वत्सस्य मातरः सनीळाः ।
ऋतस्य सानावधि चक्रमाणा रिहन्ति मध्वो अमृतस्य वाणीः ॥३॥
जानन्तो रूपमकृपन्त विप्रा मृगस्य घोषं महिषस्य हि ग्मन् ।
ऋतेन यन्तो अधि सिन्धुमस्थुर्विदद्गन्धर्वो अमृतानि नाम ॥४॥
अप्सरा जारमुपसिष्मियाणा योषा बिभर्ति परमे व्योमन् ।
चरत्प्रियस्य योनिषु प्रियः सन्सीदत्पक्षे हिरण्यये स वेनः ॥५॥
नाके सुपर्णमुप यत्पतन्तं हृदा वेनन्तो अभ्यचक्षत त्वा ।
हिरण्यपक्षं वरुणस्य दूतं यमस्य योनौ शकुनं भुरण्युम् ॥६॥
ऊर्ध्वो गन्धर्वो अधि नाके अस्थात्प्रत्यङ्चित्रा बिभ्रदस्यायुधानि ।
वसानो अत्कं सुरभिं दृशे कं स्वर्ण नाम जनत प्रियाणि ॥७॥
द्रप्सः समुद्रमभि यज्जिगाति पश्यन्गृध्रस्य चक्षसा विधर्मन् ।
भानुः शुक्रेण शोचिषा चकानस्तृतीये चक्रे रजसि प्रियाणि ॥८॥

Translation - भाषांतर
N/A

References : N/A
Last Updated : 2016-11-11T12:48:04.9200000

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.

गृत्समद

  • n. यह एक व्यक्ति का तथा कुल का भी नाम है । यह अंगिरस् कुल के शुनहोत्र का पुत्र हैं (सर्वानुक्रमणीं देखिये) यह बाद में भार्गव हो गया । गृत्समद शब्द की व्युत्पत्ति, ऐतरेय आरण्यक में आयी है । गृत्स का अर्थ है प्राण, तथा मद का अर्थ है अपान । इसमें प्राणापानों का समुच्चय था, इसलिये इसे गृत्समद कहते है [ऐ.आ.२.२.१] । यह तथा इसके कुल के व्यक्ति, ऋग्वेद के दूसरे मंडल के द्रष्टाएँ हैं [ऐ. ब्रा५.२.४];[ ऐ.आ.२.२.१]; सर्वानुक्रमणी देखिये । एक बार तपप्रभाव से इसे इंद्र का स्वरुप हुआ । इस बारे में तीन आख्यायिकाएँ प्रसिद्ध है (१) धुनि अथा चुमुरि ने इसे इंद्र समझ कर घेर लिया । ‘मैं इंद्र नहीं हूँ’ यह बताने के लिये इसने इंद्र का उत्कृष्ट वर्णन करनेवाला ‘स जनास इंद्रः’ [ऋ.२.१२] ।, अह टॆकयुक्त सूक्त कहना प्रारंभ किया। (२) इंद्रादिक देवता वैन्य के यज्ञ में गये । वहॉं गृत्समद भी था । दैत्य इंद्र का वध करने के हेतु से वहॉं आये । इंद्र गृत्समद का रुप ले कर भाग गया । असुरों ने गृत्समद को घेरा । उस समय एक सूत से इसने इंद्र का उत्कृष्ट वर्णन किया [ऋ. २. १२] (३) गृत्समद के घर में अकेले आये इंद्र को देख कर शत्रुओं ने घेरा । तब इंद्र गृत्समद का रुप ले कर भाग गया । घर के गृत्समद को उन्हों ने इंद्र समझ कर पकड लिया । तब इसने यह सूक्त कह कर इंद्र का वर्णन किया [ऋ. २.१२] । ऋग्वेद के दूसरे मंडल में गृत्समद का बार बार उल्लेख आता है [ऋ. २.४.९, १९.८ इ.] । इसे शुनहोत्र भी कहा है [ऋ. २.१८.६, ४१.१४, १७] । ऋग्वेद के दूसरे मंडल की ऋचाओं का उल्लेख गार्त्समद ऋचा के नाम से प्राप्य है [सां. आ. २२.४,२८.२] । यह भृगुकुल का गोत्रकार, प्रवर तथा मंत्रकार है । गृत्समद भार्गव शौनक ऋग्वेद का सूक्तद्रष्टा है [ऋ. २.१-३, ८-४३, ९.८६, ४६-४८] । एक बार चाक्षुष मनु का पुत्र वरिष्ठ इंद्र के सहस्त्रवार्षिक सत्र में आया । साम अशुद्ध गाने के लिये इसे दोष दे कर, रुक्ष अरण्य में क्रूर पशु बनने का शाप वरिष्ठ नें इसे दिया । परंतु शंकर की कृपा से यह मुक्त हुआ [म.अनु. १८.२०-२८] । गृत्तमद का भृगुवंश में उल्लेख है [मत्स्य. १९५.४४-४५] गृत्समद का पैतृक नाम शौनक है । यह शुनहोत्र का औरस पुत्र तथा शुनक का पुत्र था । अतः प्रथम यह आंगिरस् कुल में था, एवं बाद में भृगुकुल में गया [ऋ.ष्यनुक्रमणी२] 
RANDOM WORD

Did you know?

प्रासंगिक पूजा म्हणजे काय? त्या कोणकोणत्या?
Category : Hindu - Puja Vidhi
RANDOM QUESTION
Don't follow traditions blindly or ignore them. Don't assume a superstition either. Don't be intentionally ignorant. Ask us!!
Hindu customs are all about Symbolism. Let us tell you the thought behind those traditions.
Make Informed Religious decisions.

Featured site

Ved - Puran
Ved and Puran in audio format.