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समय मातृका - उपसंहारः

क्षेमेंद्र के ग्रंथ समयमातृका का रचनाकाल १०५० ई है। यह एक हास्य प्रहसन का अत्युत्तम ग्रंथ है ।


उपसंहारः
N/Aसालङ्कारतया विभक्ति-रुचिर-च्छाया विशेषाश्रया
वक्रा सादर-चर्वणा रसवती मुग्धार्थ-लब्धा परम् ।
आश्चर्योचित-वर्णना-नव-नवास्वाद-प्रमोदार्चिता
वेश्या सत्-कवि-भारतीव हरति प्रौढा कला-शालिनी ॥१॥
संवत्सरे पञ्चविंशे पौष-ऊक्लादि-वासरे ।
श्रीमतां भूति-रक्षायै रचितो’यं स्मितोत्सवः ॥२॥
अदिर्-च्छिद्र-विनिद्र-रौद्र-फ्णिनाम् अत्रास्ति कालं कुलं
मत्तास् तत्र वसन्ति दन्ति-पतयः सिंहाश्रयेयं गुहा ।
इत्य् आर्ति-प्रतिबद्ध-वृद्ध-शबरी वर्गेण मार्गाग्रगा
यद् वैरि-प्रमदाः सदा वन-मही-गाढ-ग्रहे वारिताः ॥३॥
वीरस्यार्त-दया-विधेय-मनसः शील-व्रतालङ्कृतेर्
निस्त्रिंशः पर-दार-कृज्-जय-विधौ यस्यैक-कार्यः सुहृत् ।
तस्यानन्त-मही-पतेर् विरजसः प्राज्याधिराज्योदये
क्षेमेन्द्रेण सुभाषितं कृतम् इदं सत्-पक्ष-रक्षा-क्षमम् ॥४॥

इति श्री-क्षेमेन्द्र-कृता समय-मातृका समाप्ता ॥

Translation - भाषांतर
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References : N/A
Last Updated : 2016-11-11T11:55:20.0530000

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