TransLiteral Foundation
Don't follow traditions blindly or don't assume a superstition either.
Don't be intentionally ignorant. Ask us!! Make Informed Religious Decisions!!
मराठी मुख्य सूची|मराठी साहित्य|अनुवादीत साहित्य|निर्णयसिंधु|द्वितीय परिच्छेद|
द्वितीय परिच्छेद
निर्णयसिंधु - द्वितीय परिच्छेद

निर्णयसिंधु - द्वितीय परिच्छेद

निर्णयसिंधु ग्रंथामध्ये कोणत्या कर्माचा कोणता काल, याचा मुख्यत्वेकरून निर्णय केलेला आहे.


  |  
  |  
: Folder : Page : Word/Phrase : Person

References : N/A
Last Updated : 2013-05-24T06:01:33.9830000

Comments | अभिप्राय

Comments written here will be public after appropriate moderation.
Like us on Facebook to send us a private message.

रुरु IV.

  • n. एक दैत्य, जो ब्रह्मा के द्वारा प्राप्त वर से अत्यंत उन्मत्त हुआ था । इसी उन्मत्तता के कारण, इसने देवताओं पर हमला किया । इस पर सारा देवगण भाग गया, एवं वे आत्मरक्षा के लिए शंकर के जटा से निकली हुई एक शक्त्ति की शरण में आये, जो नीलपर्वत पर तपस्या कर रही थी । इतने में देवताओं का पीछा करता हुआ रुरु दैत्य भी ससैन्य वहाँ आ पहुँचा । इस पर शक्ति देवी ने विकट हास्य किया, जिससे डाकिनी की एक सेना उत्पन्न हुई । उस सेना ने इसके सैन्य के सारे दैत्यों का नाश किया । देवी ने अपने पाँव के अंगूठे के नाखून से वध किया । पश्वात् भगवान् शिव ने स्वयं प्रकट हो कर, डाकिनियों को अनेक वर प्रदान करते हुए कहा, ‘आज से लोग तुम्हे जगन्माता मानेंगे’ [पद्म. सृ. ३१] । स्कंद में इसे रथंतर कल्प में उत्पन्न हुआ दैत्य कहा गया है, एवं एक ऋषि के द्वारा उत्पन्न की गयीं कुमारिकाओं से इसका वध होने की कथा वहाँ प्राप्त है [स्कंद. ७.१. २४२-२४७] 
RANDOM WORD

Did you know?

घरातील देव्हारा पूर्व पश्चिम कां ठेवतात, इतर दिशा कां वर्ज्य?
Category : Hindu - Traditions
RANDOM QUESTION
Don't follow traditions blindly or ignore them. Don't assume a superstition either. Don't be intentionally ignorant. Ask us!!
Hindu customs are all about Symbolism. Let us tell you the thought behind those traditions.
Make Informed Religious decisions.

Featured site