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सार्थ श्रीएकनाथी भागवत - अध्याय चवथा

सार्थ श्रीएकनाथी भागवत - अध्याय चवथा

नाथमहाराजांचा हा प्रासादिक ग्रंथ परमपूज्य असल्याने यावर भक्तजनांची आदरबुद्धी आहे.


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References : N/A
Last Updated : 2011-09-19T11:13:49.6630000

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महावीर II.

  • n. एक आचार्य, जो स्वायंभुव मनु के सुविख्यात पुत्र प्रियव्रत राजा के तीन विरक्त पुत्रों में से एक था । इसकी माता का नाम बार्हिष्मती था । इसे ‘घृतोद’ नामान्तर भी प्राप्त था । अपने बाल्यकाल में ही तपस्या के लिए यह वन में चला गया, एवं पश्चात् इसने संन्यासाश्रम का स्वीकार किया । यह श्रीकृष्ण का परमभक्त था, जिस कारण ज्ञानसंपन्न हो कर, इसने ब्रह्मत्व प्राप्त किया [भा.५.१] 
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सुतकात वर्ज्य कार्ये कोणती? गोड सुतक म्हणजे काय?
Category : Hindu - Traditions
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