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p p d khadilkar

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तपती

  • n. विवस्वत् सूर्य की छाया से उत्पन्न कन्या [म.आ.९०.४०];[ भा.९.२२.४,६.६.२१] । यह अत्यंत रुपवती थी । इसकी सावित्री नामक बहन थी । एकबार ऋक्षपुत्र संवरण मृगया खेल रहा था । उसका अश्व अचानक मृत हो गया । वह पास के पर्वत पर पैदल ही घूमने लगा । वहॉं तपती इसे दिखाई पडी । इसके रुपयौवन पर वह मोहित हुआ । अपने साथ गांधर्वविवाह करने के लिये तपती से उसने प्रार्थना की । इस पर तपती ने कहा, ‘हमारे विवाह के लिये, अपने पिता की संमति चाहिये’ पश्चात् सूर्याराधना कर, संवरण ने तपती से विवाह करने की अनुमति सूर्य से प्राप्त की । तपती से संवरण को कुरुवंशसंस्थापक कुरु नामक पुत्र हुआ [म.आ.१६०-१६२] 
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gharat javalchi vyakti vaarlya nanter, lok ek varsha san saajre ka karat nahit?
Category : Hindu - Philosophy
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